हिंगना में मुरुम माफियाओं का राज: सरकारी जमीन पर अवैध उत्खनन, करोड़ों की कमाई; अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
Hingna Mining News: हिंगना के मोहगांव और मेटाउमारी में स्थायी तहसीलदार न होने से मुरुम माफिया सक्रिय हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर अवैध उत्खनन कर करोड़ों की कमाई का आरोप है।
- Written By: रूपम सिंह
अवैध उत्खनन (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Hingna Illegal Mining: हिंगना तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध मुरुम उत्खनन का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। मोहगांव और मेटाउमारी क्षेत्र में दिन-रात खुलेआम मुरुम की खुदाई किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुरुम माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का भी कोई डर नहीं रह गया है। हिंगना तहसील में पिछले पांच महीनों से स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति नहीं होने के कारण राजस्व प्रशासन की निगरानी कमजोर पड़ गई है। इसी का फायदा उठाकर अवैध उत्खनन करने वाले गिरोह सक्रिय हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय जेसीबी और डंपरों की सहायता से बड़े पैमाने पर मुरुम निकाला जा रहा है। विशेष रूप से भारी वाहनों के माध्यम से बड़े स्तर पर मुरुम की चोरी की जा रही है।
अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
स्थानीय नागरिकों ने कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और मुरुम माफियाओं के बीच मिलीभगत होने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसी कारण अवैध उत्खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
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कुछ वर्ष पहले साधारण आर्थिक स्थिति में रहने वाले लोग आज करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक बन गए हैं। साथ ही, कुछ राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के निजी कार्यक्रमों में मुरुम माफियाओं की उपस्थिति भी देखी गई है। मेटाउमारी ग्राम पंचायत क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर मुरुम उत्खनन किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। इस पूरे मामले में कुछ ग्राम पंचायत पदाधिकारियों की संलिप्तता होने की भी चर्चा है।
पटवारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
संबंधित क्षेत्र के पटवारियों की कार्यप्रणाली पर भी नागरिकों ने प्रश्नचिह्न लगाए हैं। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों की जानकारी होने के बावजूद अवैध उत्खनन रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, इससे प्रशासन की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।
सर्वे नंबर 101 का खेल
हिंगना तहसील के मौजा मेटाउमारी, पटवारी हल्का क्रमांक 61 में महाराष्ट्र सरकार की 15.74 हेक्टेयर पहाड़ी भूमि स्थित है, जिसका खसरा नंबर 101 है। आरोप है कि इस भूमि पर वडार समाज के कुछ लोगों के नाम पर तहसील कार्यालय से लगभग 200 ब्रास मुरुम उत्खनन की अनुमति लेकर मुरुम माफिया करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कर रहे हैं। जिन लोगों के नाम पर अनुमति ली जाती है, उन्हें केवल मामूली राशि दी जाती है।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी
अब तक इस संबंध में हमारे पास कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर निश्चित रूप से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वंदना सवरंगपते, एसडीओ नागपुर ग्रामीण
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संपत्ति की जांच की मांग
सूत्रों के अनुसार, कुछ मुरुम व्यवसायी बहुत कम समय में करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक बन गए है। इसलिए उनकी संपत्ति के स्रोत की जांच करने की मांग उठ रही है। साथ ही कुछ राजस्व अधिकारियों और मुरुम माफियाओं के बीच कथित आर्थिक लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीण नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अवैध उत्खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा हिंगना तहसील में तत्काल स्थायी तहसीलदार नियुक्त करने की मांग की गई है।
