नागपुर में दिल्ली जैसा ‘अग्नि तांडव’ होने का डर: नियमों को ताक पर रख चल रहे होटल, पब प्रशासन की लापरवाही

Nagpur Fire Safety: दिल्ली होटल अग्निकांड से सबक न लेते हुए नागपुर में नियमों को ताक पर रखकर अवैध होटल, पब और रेस्तरां चल रहे हैं, जिससे लाखों नागरिकों की जान हर वक्त बड़े खतरे में है।
Ignoring the Delhi hotel fire tragedy, illegal pubs and restaurants thrive in Nagpur due to lax enforcement by the fire department, risking thousands of lives.
होटल, प्रमोद ठाकुर (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

Nagpur Fire Safety Illegal Hotels: देश की राजधानी दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग और उसमें 21 जिंदगियों के खाक होने की दर्दनाक घटना से ऑरेंज सिटी के प्रशासन को सबक लेने की जरूरत है। सिटी में क्या पुरानी बिल्डिंग और क्या नई बिल्डिंग, सभी जगह एक ही स्थिति है। जैसे-जैसे जुगाड़ की बदौलत होटल, रेस्टोरेंट, पब, लाउंस, हुक्का पार्लर खोले जा रहे हैं और चलाये जा रहे है।

एक-एक रेस्टोरेंट में दर्जनों लोग एक साथ रहते हैं। ये कैसे चल रहे हैं, इन्हें किस विभाग से मंजूरी मिली है यह तो प्रशासन ही बता सकता है लेकिन एक बात तय है कि लोगों की जान को बहुत बड़ा जोखिम है और इसका खामियाजा कभी भी, किसी भी वक्त भुगतना पड़ सकता है। बार-पब, रेस्टोरेंट संचालक इतने शातिर हैं कि वे नियमों को घुमा देते हैं, ताकि अग्निशमन विभाग वहां पहुंच ही नहीं पाए। इतना ही नहीं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के पास इतना टाइम भी नहीं है कि वे ऐसे 'स्थलों' का मुआयना भी करें। कुल मिलाकर लोगों की जान को जोखिम में डाल दिया गया है जो एक बड़े हादसे को निमंत्रण ही दे रहा है।

नागपुर के चप्पे-चप्पे और संकरी गलियों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे अवैध होटल, रेस्तरां और पब इस बात का खुला सबूत हैं कि शहर में कभी भी दिल्ली जैसा 'अग्नि तांडव' दोहराया जा सकता है। हालात इतने बदतर हैं कि इन व्यावसायिक ठिकानों की सुध लेने वाला और जांच-पड़ताल करने वाला कोई नहीं है जिससे लाखों नागरिकों का जीवन हर वक्त दांव पर लगा हुआ है।

आलीशान इमारतें भी दागी

हैरानी की बात यह है कि आग से सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन केवल पुरानी या तंग बस्तियों तक सीमित नहीं है। शहर में हाल ही में बनीं नई और आलीशान बिल्डिंगों में भी अग्नि सुरक्षा के मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक जहां गाड़ियों की पार्किंग होनी चाहिए वहां अवैध रूप से रेस्तरां और कैफे संचालित हो रहे हैं। बहुमंजिला इमारतों की छतों पर बिना उचित एनओसी के पब, बार और रेस्तरां धड़ल्ले से चल रहे हैं जहां आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता तक नहीं है। जमीन पर कुछ नहीं, कागजों पर सब दुरुस्त शहर में रोजाना छोटी-बड़ी आगजनी की घटनाएं हो रही हैं लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। सूत्रों की मानें तो अग्निशमन विभाग पूरी तरह से 'सिस्टम' के भरोसे चल रहा है।

सिस्टम लगाओ, छुटकारा पाओ

विभाग के भीतर यह नीति इस कदर हावी हो चुकी है कि ऊपरी 'सैटिंग' और कागजी खानापूर्ति होते ही अवैध कारोबारों को हरी झंडी दे दी जाती है। अधिकारियों की नाक के नीचे यह जानलेवा खेल चल रहा है लेकिन सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों का मौन

इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक और चिंताजनक पहलू यह है कि इस अवैध नेटवर्क और लापरवाही की जानकारी होने के बाद भी प्रशासनिक महकमे के वरिष्ठ अधिकारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। न तो किसी बड़े अधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण किया जा रहा है और न ही नियमों का उल्लंघन करने वाले रसूखदार होटल मालिकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई हो रही है।

नागरिकों की जान से खिलवाड़ कब तक

  • दिल्ली की घटना चीख-चीखकर यह चेतावनी दे रही है कि अगर समय रहते नागपुर के इन अवैध और असुरक्षित होटलों-पबों पर बुलडोजर नहीं चला या इन पर ताले नहीं जड़े गए तो नागपुर को श्मशान बनते देर नहीं लगेगी।
  • जनता अब प्रशासन से सीधे सवाल पूछ रही है कि क्या विभाग किसी बड़ी त्रासदी के होने का इंतजार कर रहा है, तभी उसकी आंखें खुलेंगी।

ये भी पढ़ें :-

नोटिस नहीं, जमीन पर उतरें अधिकारी

ऐसा देखा जा रहा है कि अग्निशमन विभाग के अधिकारी नोटिस देकर अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं। वे अपनी नौकरी बचाने के पीछे पड़े हैं, जबकि जनता को 'अग्नि तांडव' की संभावनाओं के बीच धकेल रहे है, जमीन पर ये अधिकारी कुछ भी नहीं करते। एक भी संपति की जांच ये खुद से नहीं करते हैं। दलालों के जरिए एनओसी देना और दलालों के मार्फत ही मुआयना करना इनकी नीति है। यही कारण है कि नागपुर में अवैध बिल्डिंग, दुकान, पब, रेस्टोरेंट, लॉन, हुक्का पार्लर की बाढ़ सी आ गई है। इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाना जरूरी हो गया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी ये अपने स्थान से हिल नहीं रहे हैं। - प्रमोद ठाकुर, नगरसेवक

Navbharat Live
navbharatlive.com