मानवीय आधार पर हाई कोर्ट का फैसला, पिता के निधन पर आरोपी को राहत; अंतिम संस्कार के लिए मिली बेल
Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट ने पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आरोपी पवन राठौड़ को मानवीय आधार पर 6 दिन की अस्थायी जमानत दी।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर हाई कोर्ट जमानत,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur High Court Temporary Bail: नागपुर निचली अदालत द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद पवन राठौड़ ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। अपील के लंबित रहने के दौरान अचानक पिता की मृत्यु के कारण उनके अंतिम संस्कार का हवाला देते हुए अस्थायी जमानत के लिए अजी दायर की। इस पर सुनवाई के बाद अवकाशकालीन न्यायाधीश राज वाकोडे ने मानवीय आधार पर फैसला सुनाते हुए पिता के अंतिम संस्कार और परिवार को सांत्वना देने के लिए 6 दिनों की अस्थायी जमानत प्रदान कर दी।
उल्लेखनीय है कि मेहकर तहसील स्थित कंका गांव के निवासी पवन राठौड़ पर डोंगांव पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103(1) और 3(5), तथा अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2) और 3(v) के तहत गंभीर आरोप दर्ज हैं। पुलिस ने उसे 5 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया था और 27 फरवरी 2025 को इस मामले में चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
सत्र न्यायालय द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद से आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील की थी जो अभी विचाराधीन है। मानवीय आधार पर दी गई राहत राठौड़ की पैरवी कर रह अधि। सिरपुरकर ने अदालत को बताया कि 23 मई 2026 को आरोपी के पिता गुलाब राठौड़ का निधन हो गया। उन्होंने तर्क दिया कि पवन परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है, इसलिए पिता के अंतिम संस्कार के लिए उसका रिहा होना बेहद जरूरी है।
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31 को करना होगा सरेंडर
अदालत ने आरोपी पवन राठौड़ को 26 से 31 मई 2026 तक के लिए 50,000 रुपये के पीआर बॉन्ड और एक या दो जमानतदारी की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि इस दौरान आरोपी को कई सालों का पालन करना होगा, जिसके अनुसार आरोपी को 27 और 29 मई 2026 को दोपहर 3 से 4 बजे के बीच डोंगांव पुलिस स्टेशन में उपस्थित होकर रिपोर्ट करना होगा, जमानत अवधि के दौरान आरोपी अपने गांव कंका की सीमा से बाहर नहीं जा सकेगा।
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आरोपी को 31 मई 2026 की शाम 6 बजे तक सेंट्रल जेल के अधीक्षक के सामने अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा। नागपुर न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि 31 मई 2026 (शाम 6 बजे) के बाद इस अस्थायी जमानत की अवधि को किसी भी कारण या परिस्थिति में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
