हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Bribe Case High Court: हाई कोर्ट ने सिंदखेड (राजा) में राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज (म्यूटेशन) करने के एवज में एक लाख रुपये की अवैध मांग किए जाने के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने आदेश में सिंदखेड (राजा) के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) को रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच करने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
रामेश्वर यशवंत चौधरी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर बताया कि सिंदखेड (राजा) के तहसीलदार ने 28 मार्च 2025 को तथ्यों की जांच के बाद याचिकाकर्ताओं के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने (म्यूटेशन) का आदेश पारित किया था।
जब याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश के पालन के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी से संपर्क किया, तो अधिकारी ने उनसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लाने को कहा। इस पर याचिकाकर्ताओं ने सिंदखेड (राजा) के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के समक्ष आवेदन किया, जिन्होंने उचित जांच के बाद 1 अक्टूबर 2025 को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालत से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र मिलने और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद अधिकारी ने म्यूटेशन करने के एवज में 1,00,000 रुपये की अवैध मांग की। याचिकाकर्ताओं के अनुसार अधिकारी ने यह भी धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए गए, तो वह तहसीलदार के आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
अधिकारी के इस रवैये के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने 3 नवंबर 2025 को बुलढाणा के जिलाधिकारी और सिंदखेड (राजा) के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) को कानूनी नोटिस भेजा। अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे अधिवक्ता ए.जे. ठक्कर ने बताया कि कानूनी नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने न तो म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की और न ही रिश्वत मांगने वाले अधिकारी पर कोई कार्रवाई की, जिसके बाद उन्हें हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सिंदखेड (राजा) के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) को निर्देश दिया कि वह तहसीलदार के 28 मार्च 2025 के आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। अदालत ने एसडीओ को यह भी आदेश दिया कि वह कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोपों की उचित जांच करें और यदि रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करें।
यह भी पढ़ें – शिवसेना में बड़ा फेरबदल, नागपुर में संजय निरुपम की एंट्री, तुमाने बाहर, कई दिग्गज नेताओं के हुए तबादले
कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति पेश किए जाने की तारीख से 4 सप्ताह के भीतर पूरी की जानी चाहिए। इसके साथ ही लिए गए निर्णय से याचिकाकर्ताओं को 2 सप्ताह के भीतर अवगत कराने का भी निर्देश दिया गया। हाई कोर्ट ने एसडीओ को अनुपालन से जुड़ी ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ अदालत की रजिस्ट्री में जमा करने का भी कड़ा निर्देश दिया।