Nagpur News: सीताबर्डी के संगम पतंग बिल्डिंग में लगी भीषण आग, 10 दमकल वाहन पहुंचे, काबू पाने में लगे 4 घंटे
- Written By: नवभारत डेस्क
नागपुर. दीपावली पूर्व का पहला संडे सीताबर्डी के व्यापारियों पर मुसीबत बनकर आया. रवि पुष्य नक्षत्र होने और दिवाली की खरीदारी का दिन होने के कारण सभी ने कमर कस रखी थी. व्यापार भी अच्छा चल रहा था लेकिन अचानक मेन रोड पर स्थित संगम पतंग बिल्डिंग में आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि हर तरफ अफरातफरी मच गई. घटना की जानकारी मिलते ही अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं. 10 दमकल वाहन मौके पर बुलाए गए. इसके बाद भी आग पर काबू पाने में 4 घंटे लग गए. हादसे में कोई जनहानि तो नहीं हुई लेकिन आर्थिक हानि बहुत ज्यादा हुई है.
इस घटना से व्यापारियों में मायूसी छायी है. सीताबर्डी मेन रोड पर अजय चौरसिया और पापा चौरसिया की 4 मंजिला इमारत है. यह इमारत संगम पतंग के नाम से प्रसिद्ध है. दोनों भाई तल मंजले और पहले माले पर अजय गारमेंट, संगम पतंग व फेस्टिवल आयटम, पद्मा जनरल स्टोर और संगम बेल्ट हाउस चलाते हैं. दूसरे और तीसरे माले पर परिवार रहता है. रविवार को दूकानें खोलने के बाद चौरसिया बंधु भी ग्राहकी में जुटे थे. दोपहर 2.30 बजे के दौरान पद्मा जनरल स्टोर में शार्ट सर्किट के कारण आग लग गई. प्लास्टिक मटेरियल ज्यादा होने के कारण आग तेजी से फैलने लगी. दोनों दूकानों से ग्राहकों को बाहर निकाला गया लेकिन परिवार की महिला और 1 बच्चा ऊपर फंस गए. स्थानीय नागरिकों की मदद से दोनों को बाहर निकाला गया और दमकल विभाग को जानकारी दी गई.
टीटीएल बुलाना पड़ा
रविवार और दिवाली का अवसर होने के कारण मेन रोड पर ज्यादा भीड़ थी. व्यापारियों और हॉकरों ने सतर्कता से काम लिया और दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही रास्ता खाली करवाया गया. सीएफओ चंदनखेड़े और फायर अफसर तुषार बाराहाते अपनी टीम के साथ परिसर में दाखिल हुए. आग भयानक रूप से चुकी थी. सीजन के चलते दूकानों में बहुत ज्यादा माल भरा गया था लेकिन एंट्री का केवल एक ही दरवाजा था. इस वजह से दमकल विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आग ऊपरी मालों पर न जाए इसीलिए टेबल टर्न लैडर (टीटीएल) बुलवाया गया. एक के बाद एक 10 वाहन मौके पर पहुंचे. ऊपर से टीटीएल और नीचे से अग्निशमन कर्मचारी जद्दोजहद में जुटे रहे. आग पर काबू पाने में फिर भी 4 घंटे लग गए. तीनों दूकानों का सारा माल जलकर खाक हो गया.
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मॉल के टैंक से मिली मदद
बाराहाते ने बताया कि बगल में स्थित ग्लोकल मॉल प्रबंधन से काफी मदद मिली. मॉल के नीचे बने अंडरग्राउंड में 2 लाख लीटर वॉटर टैंक से पानी मिल गया, इसीलिए वाहनों की आवाजाही का समय बच गया. पर्याप्त मात्रा में पानी मिलने से आग पर नियंत्रण पाने में आसानी हुई. आग लगने का कारण शार्ट सर्किट हो सकता है क्योंकि जिस समय आग लगी तीनों दूकानों में ग्राहकी चल रही थी. पिछली तरफ से आग लगी और पूरे परिसर में फैल गई.
रात 8 बजे तक नहीं थी बिजली
दूकानदारों ने बताया कि यह संडे दिवाली के व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. आग लगने के कारण मेन रोड पर दोनों तरफ से आवाजाही बंद हो गई. ऐसे में ग्राहक खरीदारी के लिए नहीं आ पाए. शाम को आग बुझने के बाद केवल 2 घंटे मिले लेकिन बिजली गुल थी. ऐसे में कुछ लोगों ने टॉर्च और इमरजेंसी लाइट जलाकर काम चलाया. लेकिन ग्राहकों को कैसे समझाते. बड़ी संख्या में लोग महल, इतवारी और जरीपटका की ओर बढ़ गए. 8 बजे के बाद बिजली आई. तब तक पूरे शहर में आग की खबर फैल चुकी थी, इसीलिए ग्राहकी नहीं हुई.
