मंत्री नरहरि झिरवल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Illegal Transfer FDA: अन्न एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) में ‘मंत्री’ और ‘संतरी’ के खासमखास लोगों का नियम तोड़कर तबादला, तबादले के बाद विशेष दस्ते का प्रमुख बनाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। अब जबकि मुंबई में एक पीए के गिरफ्तारी हुई है, विदर्भ में भी कार्यप्रणाली को लेकर आवाज उठने लगी है।
विभागीय अधिकारियों के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है कि एक अधिकारी को 1 वर्ष के अंदर तबादला कर नागपुर लाया जाना और कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंप देना किसी रहस्य से कम नहीं है। कार्रवाई होने के महज कुछ ही दिनों में उस अधिकारी को ‘प्रमोशन’ का तोहफा भी दे दिया गया। नियमों को ताक पर हुए तबादले और प्रमोशन को लेकर लोग यही कहने लगे हैं कि अधिकारी को ‘दस में से दस’ अंक मिल गए, ताकि संपूर्ण विदर्भ में ‘राज’ कर सके जबकि वर्षों से कार्यरत अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रह गए।
मंत्री का पीए नहीं पकड़ा जाता, तो ये मुद्दे भी दब जाते, लेकिन जब मंत्री के पीए रंगेहाथ पकड़ा गया, तो लोग दबी जुबान से ही सही, आवाज बुलंद करने लगे हैं। ‘विशेष दस्ते’ पर सवाल उठाने लगे हैं। इसकी जरूरत पर भी लोग अब ‘अंगुली’ उठा रहे हैं क्योंकि एफडीए के अंदर पहले से ही विजिलेंस टीमें होती हैं। यही विजिलेंस टीमें संभाग स्तर पर कार्रवाई को अंजाम देती हैं, लेकिन ‘विशेष दस्ते’ का गठन ही ‘विशेष’ उद्देश्य से गठित किया गया है।
जानकारों ने बताया कि मंत्रालय के इशारे पर बने विशेष दस्ते में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिन पर गंभीर आरोप लगे हुए हैं। राज्य के एक जिले का प्रमुख ऐसा व्यक्ति है, जिस पर खुद सुपारी तस्करी करने का आरोप है और उस पर एफआईआर तक दर्ज है। इसी प्रकार एक जिले का प्रमुख ऐसा है, जिसके वाहन से 5 करोड़ रुपये नकद बराबद किए गए थे।
इस अधिकारी पर कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन उसे ‘विशेष दस्ते’ का प्रमुख बनाकर पुरस्कृत किया गया है। इस प्रकार एक-एक जिले में चुन-चुन कर लोगों की नियुक्ति ‘विशेष’ उद्देश्य से ही किए जाने की सावर्जनिक चर्चा है। विदर्भ में भी भंडारा में नियुक्त अधिकारी को महज कुछ महीनों में नागपुर लाकर विशेष दस्ते की जिम्मेदारी सौंप देना चर्चा में है।
मुंबई के इशारे पर नागपुर में 25 से 28 जनवरी तक विशेष दस्ते की कार्रवाई कोल्ड स्टोरेज में की गई थी, जिसमें बाउंसर तक का सहारा लिया गया था। इस कार्रवाई में लगभग 10 करोड़ का माल जब्त किया गया था। इसके दो दिन बाद ही ‘यदुवंशी’ ‘राज’ की पटकथा लिखी गई। उक्त अधिकारी को महज दो दिनों के अंदर इनाम दे दिया गया।
मंत्रालय और मंत्रालय के अधिकारी इतने खुश हुए कि ‘एक ही पत्र’ में नागपुर और अमरावती के विशेष दस्ते की जिम्मेदारी सौंप दी गई। नियमानुसार 2 वर्ष के पूर्व तबादले नहीं होते। लेकिन ‘ऊपर’ वाले का ‘टार्गेट’ सटीक था और उसका ‘निशाना’ भी सही लगा। बाकी लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रह गए।
यह भी पढ़ें – महाराष्ट्र में 22 हजार मराठी स्कूल बंद? विजय वडेट्टीवार ने खोला सरकार का ‘सीक्रेट एजेंडा’, राजनीति गरमाई
हाल ही में नरहरि झिरवाल के तंत्र द्वारा की गई कार्रवाइयों में एक पैटर्न नजर आया है। टीमें केवल बड़े गोदामों पर छापेमारी करती हैं जहां से करोड़ों की डील की संभावना होती है लेकिन छोटे स्तर पर बिकने वाले गुटके, जो सीधे तौर पर युवाओं और मजदूरों को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यह ‘छापेमारी’ केवल बड़े व्यापारियों को डराकर अपना हिस्सा तय करने का एक जरिया है।
पब्लिक और व्यापारियों का कहना है कि शहर में बड़े पैमाने पर रोजमर्रा की चीजों जैसे दूध, दही, पनीर, खाद्य तेल, मसाला सहित अन्य उत्पादों की ओर विभागीय अधिकारियों की नजर नहीं जाती। इसके कारण लोगों को रोज मिलावटी सामान खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है। होटलों की हाईजेनिक स्थिति भी ये देख नहीं पाते। ये पब्लिक के लिए नहीं, महज कुछ ‘लाभ’ के लिए ही काम कर रहे हैं। इस ‘कृष्ण’ लीला में सभी ‘जय-जय’ कर अपना उल्लू ‘पूरा’ कर रहे हैं।