कुंभ से पहले नीलकंठेश्वर मंदिर संरक्षण कार्य अंतिम चरण में, गोदावरी तट पर ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्स्थापन तेज
Neelkantheshwar Temple Restoration: नासिक कुंभ मेले से पहले गोदावरी तट स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में संरक्षक परत और पत्थरों के पुनर्स्थापन का कार्य अंतिम चरण में है, ताकि मूल वास्तुशैली सुरक्षित रहे।
- Written By: अंकिता पटेल
Neelkantheshwar Temple Restoration ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Godavari Ghat Temple Renovation: नासिक कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में गोदावरी तट स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर का काम लगभग पूरा हो चुका है और नारोशंकर सभामंडप का कार्य प्रगति पर है। गोदावरी घाट के मध्य में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में फिलहाल संरक्षक परत लगाने का काम चल रहा है।
मजबूती और संरक्षण पर जोर पुरातत्व विभाग के अनुसार, मंदिर की दीवारों, छत और सतह पर सुरक्षात्मक कोटिंग की जा रही है, जिसके बाद सफाई का अंतिम दौर शुरू होगा।
अगले चरण में मंदिर के निचले हिस्से के पत्थरों को पुनः स्थापित किया जाएगा। इससे मंदिर की मूल स्थापत्य शैली की रक्षा होगी और संरचना को मजबूती मिलेगी। नीलकंठेश्वर मंदिर की वास्तुशैली भारतीय मंदिर परंपरा और स्थानीय वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है।
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नारोशंकर मंदिर की मूर्तियों ने बिखेरी दिव्य चमक
पुरातत्व विभाग द्वारा नारोशंकर मंदिर के सभामंडप में किया जा रहा कार्य अच अपने निखार पर है। आंतरिक भाग की गहन सफाई और मूर्तियों के संवर्धन के कारण उनके आसन और बारीक नक्काशी अब स्पष्ट दिखाई देने लगी है।
पहले धूल की परतों के कारण जो शिल्पकला धुंधली पड़ गई थी, वह अब श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह कार्य ऐतिहासिक मूर्तियों के विवरण और शिल्प कौशल का अध्ययन करने में सहायक सिद्ध होगा।
संवर्धन कार्य की मुख्य विशेषताएं
नीलकंठेश्वर मंदिरः सुरक्षात्मक परत और पत्थरों की पुनस्र्स्थापना, नारोशंकर मंदिर। मूर्तियों और नक्काशी की वैज्ञानिक पद्धति से सफाई, उद्देश्य कुंभ मेले के लिए प्राचीन धरोहर को सुरक्षित और सुंदर बनाना, महत्वः स्थापत्य कला के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध होना।
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नीलकटेश्वर मंदिर में वोटिंग (फोट मारना) का काम शेष है, जिसके बाद पूरी क्लिनिंग की जाएगी, नारोशंकर मंदिर की धूल साफ होने से मूर्तियां स्पष्ट हो गई है और ऊपरी हिस्से की नक्काशी भी अब साफ दिखाई दे रही है।
– नासिक, सहायक संचालक, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, अमोल गोटे
