सुपारी व्यापारियों पर नजर, गुटखा माफिया को छूट! FDA के 'समानांतर तंत्र' ने नागपुर में फैलाई दहशत

Food and Drug Administration Controversy: FDA में 'झिरवाल' के समानांतर तंत्र का खुलासा। मुंबई से बाउंसरों के साथ आती है स्पेशल टीम, स्थानीय अधिकारी बेखबर। सुपारी व्यापारियों पर टारगेटेड छापेमारी।
A parallel "Jhirwal" network within the FDA has been exposed. A special team arrives from Mumbai with bouncers, leaving local officials unaware.
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (AI Generated image)
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Mumbai FDA: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग इन दिनों ‘निजी तंत्र’ को लेकर सवालों के घेरे में है। चर्चा है कि विभाग के प्रमुख ‘नरहरि झिरवाल’ अपना एक अलग ही वर्चस्व चला रहे हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर मुंबई से सीधे टीमें भेजी जाती है जिसकी जानकारी स्थानीय कार्यालय को भी नहीं होती। यह कार्यशैली अब ‘सरकारी छापेमारी’ कम और ‘निजी वसूली अभियान’ ज्यादा नजर आ रही है।

बाउंसरों के साये में ‘सरकारी’ कार्रवाई

आमतौर पर किसी भी सरकारी छापे में स्थानीय पुलिस या विभाग के अधिकृत कर्मचारी साथ होते हैं लेकिन नरहरि झिरवाल के इस तथाकथित तंत्र में अधिकारियों के साथ निजी बाउंसर देखे जा रहे हैं। ये टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे गोदामों, दुकानों और स्टोरों पर धावा बोलती हैं और जबरन ताले खुलवाती हैं। सुरक्षा के नाम पर बाउंसरों का इस्तेमाल व्यापारियों में खौफ पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

स्थानीय इंटेलिजेंस पर सवालिया निशान

- इस पूरी प्रक्रिया ने स्थानीय प्रशासन और इंटेलिजेंस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। - यदि बाहर से कोई टीम आकर शहर में सक्रिय है तो स्थानीय खुफिया विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं। - क्या जानबूझकर स्थानीय तंत्र को अंधेरे में रखा जा रहा है ताकि ‘लेन-देन’ की प्रक्रिया गुप्त रहे। - सीधे मुंबई से टीम आने की प्रक्रिया ही अपने आप में भारी शंका पैदा करती है।

मुख्य टारगेट सुपारी और स्थानीय व्यापारी

सूत्रों का दावा है कि यह पूरी कवायद जनस्वास्थ्य के लिए नहीं बल्कि सुपारी के बड़े व्यापारियों को टारगेट करने के लिए की जा रही है। सुपारी के व्यापार पर बड़े पैमाने पर छापे मारे जाते हैं और आरोप है कि मोटा ‘हिसाब-किताब’ चुकता होते ही टीमें वापस मुंबई रवाना हो जाती हैं। उनकी रिपोर्ट भी स्थानीय स्तर पर न देकर सीधे मुंबई में ही जमा की जाती है।

स्थानीय व्यापार पर संकट

झिरवाल के इस ‘अवैध’ और ‘धौंस’ वाले तंत्र के कारण स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष है। व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर डराकर वसूली की जा रही है जिससे स्थानीय व्यापार चौपट हो रहा है। अगर कुछ अवैध है तो स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए, न कि बाउंसरों के साथ आकर आतंक फैलाना चाहिए।

गुटखा खोलता है पोल

एक तरफ एफडीए के ‘स्पेशल दस्ते’ मुंबई से आकर बाउंसरों के दम पर चुनिंदा व्यापारियों के गोदाम खुलवा रहे हैं तो दूसरी तरफ शहर के चप्पे-चप्पे पर प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू खुलेआम बिक रहा है। यह विरोधाभास साफ इशारा करता है कि प्रशासन की नजर केवल वहां पड़ती है जहां ‘सुपारी’ (टारगेट) दी गई हो, जबकि आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे गुटखा माफिया को खुली छूट मिली हुई है।

प्रशासन की ‘आंखों पर पट्टी’

महाराष्ट्र में गुटखा और सुगंधित तंबाकू पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद पानठेलों से लेकर किराना दुकानों तक यह आसानी से उपलब्ध है। सवाल यह है कि अधिकारियों को यह नजर क्यों नहीं आता? क्या निचले स्तर के अधिकारियों से लेकर उच्च स्तर तक कोई गुप्त ‘मंथली’ पहुंच है?

बॉर्डर से कैसे आ रहा है माल

पड़ोसी राज्यों से ट्रकों के जरिए जहर शहर में प्रवेश कर रहा है लेकिन चेक पोस्ट और नाकों पर तैनात दस्ता गहरी नींद में क्यों है?

‘टारगेटेड’ रेड बनाम ‘ओपन’ मार्केट

हाल ही में नरहरि झिरवाल के तंत्र द्वारा की गई कार्रवाइयों में एक पैटर्न नजर आया है- टीमें केवल बड़े गोदामों पर छापेमारी करती हैं जहां से करोड़ों की डील की संभावना होती है लेकिन छोटे स्तर पर बिकने वाले गुटखे, जो सीधे तौर पर युवाओं और मजदूरों को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यह ‘छापेमारी’ केवल बड़े व्यापारियों को डराकर अपना हिस्सा तय करने का एक जरिया है।

स्वास्थ्य और कानून का मजाक

तंबाकू और गुटखे के सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां फैल रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल हजारों लोग तंबाकूजनित बीमारियों के कारण अपनी जान गंवाते हैं। ऐसे में एफडीए के अधिकारियों की यह ‘अंधभक्ति’ और ‘सेलेक्टिव अप्रोच’ सीधे तौर पर जनता के साथ विश्वासघात है।

दहशत में हैं अधिकारी

नागपुर कार्यालय में इन दिनों एक विचित्र सा माहौल है। उन्हें यह डर सता रहा है कि कभी भी यहां पर कार्रवाई हो सकती है क्योंकि नागपुर के लोगों ने भी ‘मंत्री’ के दबाव में कई कदम उठाये हैं जो नियम के अनुसार नहीं थे। इसमें लोग अपना-अपना उल्लू सीधा कर चुके हैं। उन्हें डर है कि अगर नागपुर में भी रेड हुई तो कईयों के पोल खुल जाएगी। यही कारण है कि अधिकारी डरे और सहमें हुए हैं। इस नेटवर्क में कई बड़े अधिकारियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट
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