हाई कोर्ट का कड़ा रुख: EWS प्रमाणपत्रों के ‘महाघोटाले’ पर राज्य सरकार को फटकार, 3 हफ्ते में मांगा जवाब!
EWS Certificate Scam Maharashtra: महाराष्ट्र में EWS आरक्षण का बड़ा खेल! हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा, स्टिंग ऑपरेशन में फर्जीवाड़े का खुलासा। 3 सप्ताह में मांगा विस्तृत जवाब।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Bombay High Court Nagpur Bench: महाराष्ट्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित सीटों और नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों के सुनियोजित दुरुपयोग पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने का आदेश दिया।
‘स्टिंग ऑपरेशन’ से हुआ भ्रष्टाचार का पर्दाफाश : याचिकाकर्ता सुदीप
बदाना ने अदालत में चौंकाने वाले सबूत पेश करते हुए बताया कि कैसे अपात्र लोगों को भी सरकारी प्रमाणपत्र आसानी से मिल रहे हैं। इस मामले में एक अभिभावक द्वारा अपनी बेटी के आवेदन के माध्यम से किए गए ‘स्टिंग ऑपरेशन’ का हवाला दिया गया है। नागपुर तहसील कार्यालय ने 31 दिसंबर, 2025 को एक ऐसे परिवार को ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट जारी किया, जिसकी वार्षिक आय 11,70,958 रुपये थी, जबकि नियम के अनुसार सीमा 8 लाख रुपये है।
लाभार्थी के पास 1000 वर्ग फुट से बड़ा फ्लैट न होने का नियम है, लेकिन संबंधित परिवार के पास इससे बड़ा आवासीय फ्लैट होने के बावजूद प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। 1967 के पहले के निवास का कोई प्रमाण न होने और बिना किसी फील्ड इंक्वायरी के ही राजस्व विभाग ने यह दस्तावेज थमा दिया।
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CET सेल के कामकाज पर गंभीर सवाल
अदालत में राज्य सामायिक प्रवेश परीक्षा कक्ष (सीईटी सेल) की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है। शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में 152 उम्मीदवारों ने ईडब्ल्यूएस या ओबीसी कोटे से आरक्षण का दावा किया था, लेकिन उन्होंने लाखों रुपये की फीस वाले एनआरआई या मैनेजमेंट कोटे के माध्यम से प्रवेश लिया।
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पड़ताल में लापरवाहीः सीईटी सेल ने हलफनामे में स्वीकार किया है कि वे इस बात की जांच नहीं करते कि ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ होने का दावा करने वाले छात्र मैनेजमेंट कोटे की मोटी फीस के लिए लाखों रुपये कहां से लाते हैं।
जरूरतमंदों के हक पर डाका
याचिका में तर्क दिया गया है कि प्रभावशाली और अमीर लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे गरीबों के आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। इसके कारण वास्तविक पात्र और जरूरतमंद छात्र उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित रह रहे है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस रैकेट में शामिल राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और फर्जी लाभार्थियों पर क्या कार्रवाई होती है।
