नागपुर में 15 ठिकानों पर ED की छापेमारी, सुनील केदार के करीबी और UBT नेताओं के ठिकानों पर तलाशी
ED Raid Nagpur: नागपुर-भंडारा में रेत तस्करी पर ED का बड़ा प्रहार। 15 ठिकानों पर छापेमारी, ठाकरे गुट के नेता उत्तम कापसे रडार पर। चुनाव के बीच कार्रवाई से राजनीतिक हड़कंप।
- Written By: प्रिया जैस
ईडी रेड (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sand Smuggling Scam: राज्य में चल महानगर पालिका चुनाव के बीच 4 साल पुराने रेत तस्करी से जुड़े मामले में नागपुर और भंडारा जिले के कुल 15 ठिकानों पर शुक्रवार सुबह से ईडी ने छापेमारी शुरू की। कहा जा रहा है कि कुछ कांग्रेस के एक कद्दावर नेता के करीबी कहे जाने वाले कुछ कार्यकर्ताओं के अलावा शिवसेना उद्धव गुट के भी एक नेता का समावेश है।
छापे में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए जाने की खबर है। सवाल यह, उठ रहा है कि आने वाले दिनों में जिला परिषद चुनाव की घोषणा हो सकती है। उसके पहले अचानक जांच एजेंसी क्यों जागी? दावा किया गया कि भोपाल सहित 56 ठिकानों पर कार्रवाई की गई।
ठाकरे गुट के नेता जांच के घेरे में
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह कि शिवसेना (यूबीटी) के नागपुर जिला अध्यक्ष उत्तम कापसे से जुड़े ठिकानों पर भी ईडी के छापे पड़ रहे है। इसके अलावा सावनेर के विनोद गुप्ता, प्रफुल्ल कापसे, लक्ष्मीकांत सातपुते, दादू कोलते, पाटणसावंगी के शरद राय, मनोज गायकवाड़, गुड्डू खोरगड़े तथा खापा के अमित राय सहित भंडारा निवासी अजय गहाने व अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आयी।
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जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों से फर्जी ई-टीपी और रॉयल्टी दस्तावेज तैयार कर उन्हें नागपुर जिले में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस तरीके से शासन को गुमराह कर बड़े पैमाने पर अवैध खनिज परिवहन किया गया। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर काफी हलचल है क्योंकि यह छापेमारी नगर निगम चुनावों के प्रचार के बीच हो रही है।
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चोरी की रॉयल्टी से जुड़ा है मामला
साल 2021 में नागपुर पुलिस ने कुछ रेत कारोबारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन पर आरोप था कि सरकारी रॉयल्टी चुराकर अवैध रूप से करोड़ों की रेत बेची है। इस पूरे नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जांच अभी जारी है। रेत माफिया का यह रैकेट जिला-राज्य की सीमाएं पार कर संचालित हो रहा था।
जांच में असहयोग
ईडी इस मामले में धन शोधन के एंगल से जांच कर रही है। संबंधित व्यवसायियों को पूछताछ के लिए बार-बार बुलाया गया था, लेकिन जांच में सहयोग न करने के कारण ईडी ने छापे मारे।
