संभाजीनगर मनपा चुनाव में शिवसेना आक्रामक, उद्धव ठाकरे की भव्य जनसभा; भाजपा–शिंदे गुट पर साधा निशाना

Uddhav Thackeray Rally: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना यूबीटी ने आक्रामक रुख अपनाया है। 10 जनवरी को उद्धव ठाकरे की जनसभा में शहर के लिए पार्टी का वचननामा जारी किया जाएगा।
In the Sambhaji Nagar municipal elections, the Shiv Sena is on the offensive; Uddhav Thackeray held a grand public meeting, targeting the BJP-Shinde faction.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Chhatrapati Sambhajinagar Election: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना गुट ने आक्रामक रुख अपनाया है। कल शनिवार 10 जनवरी को मराठवाड़ा सांस्कृतिक मैदान में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की भव्य जनसभा का आयोजन किया गया हैं। इसी सभा में शहर के लिए शिवसेना यूबीटी का वचननामा जारी किया जाएगा।

यह जानकारी विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने आयोजित प्रेस वार्ता में दीदानवे और पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे ने भाजपा और शिंदे गुट पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि मनपा चुनाव में शिवसेना के 100 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन चुनाव के पहले ही चरण में कुछ उम्मीदवारों को धमकियां दी जा रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दलों की ओर से दबाव की राजनीति जारी है। मराठवाड़ा सांस्कृतिक मैदान में होने वाली सभा को लेकर दानवे ने कहा कि इस मैदान के लिए भाजपा के सांसद डॉ. भागवत कराड की ओर से केवल एक दिन के लिए फोन आया था और शिवसेना ने मैदान उपलब्ध कराने की तैयारी भी दिखाई थी।

मंत्री आपस में उलझे, शहर अंधेरे में

पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे ने भी सत्ताधारियों पर तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि शहर में दो मंत्री होने के बावजूद वे आपसी विवादों में उलझे हुए हैं। अतिक्रमण हटाओ अभियान में तोड़फोड़ हुई, लेकिन सड़कों की हालत जस की तस बनी हुई है। खैरे ने आरोप लगाया कि राज्य पर 9 लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने के कारण विकास कार्यों के लिए निधि नहीं मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जून तक पानी मिलेगा या नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

पालकमंत्री इसी मैदान पर जनसभा लेकर दिखाएं

दानवे ने आरोप लगाया कि प्रशासक राज लागू होने के बाद शहर को तीन पालकमंत्री मिले, लेकिन इसके बावजूद शहर के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शहर पर 1,032 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें से 862 करोड़ रुपये केवल जलापूर्ति योजना से संबंधित हैं। इस भारी आर्थिक बोझ के कारण शहर का विकास ठप हो गया है।

नामांतर को लेकर भाजपा पर निशाना

दानवे ने कहा कि 8 मई 1988 को शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने शहर का नामकरण किया था और उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए इसका आधिकारिक नामांतर हुआ। भाजपा ने केवल नाम के आगे 'छत्रपति' शब्द जोड़कर श्रेय लेने की कोशिश की, ऐसा आरोप भी उन्होंने लगाया।

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