मिट्टी का चूल्हा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur News: दुनिया तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। बदलते दौर में आज की पीढ़ी भी बदल रही है। पहले घर में खाना मिट्टी के चूल्हे पर बनता था। सब्जी, रोटी और पूरा खाना चूल्हे पर ही बनता था। पहले शादी-ब्याह हो, छोटा-मोटा कार्यक्रम हो, धार्मिक उत्सव हो या कोई सामाजिक समारोह, कार्यक्रम का भोज बड़े-बड़े चूल्हों पर ही बनता था।
अब खाना बनाने की बात करें तो पांच तरह के व्यंजन इलेक्ट्रॉनिक चूल्हों, गैस चूल्हों पर बनते हैं। इसलिए कार्यक्रम के दौरान खाने के लिए चूल्हों की कतार अब पुरानी होने की कगार पर है। चूल्हे पर खाना बनाते समय उसका लजीज स्वाद हर जगह छा जाता है। चूल्हे पर सब्जियों का चटकरा स्वाद और सुगंध की गवाही देता है। इसलिए चूल्हे पर खाने का लजीज स्वाद कुछ अलग (अनोखा) होता है।
आधुनिक समय में स्विगी, जोमैटो जैसी कंपनियों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के भोजन और मील ऑनलाइन ऑर्डर किए जाते हैं। किसी आयोजन के लिए भोजन की योजना बनाते समय जल्दी से तैयार भोजन प्राप्त करने की प्रवृत्ति अधिक होती है। होटल व्यवसायी और कैटरर्स खाना बनाते समय लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेते नहीं दिखते।
चूल्हे की बात करें तो लकड़ी का मिल पाना काफी कठिन हो गया है, और चूंकि लकड़ी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध नहीं है, इसलिए समय के साथ मांग का रुझान स्वयं ही यांत्रिक उपकरणों की ओर बढ़ गया है। पारंपरिक उपकरणों की उपेक्षा हो रही है। इसलिए लंबे समय से उपयोग किए जा रहे चूल्हे उपेक्षित हो रहे हैं।
हर घर में मिट्टी के चूल्हे मुहावरा आज भी ग्रामीण बोलियों में एक प्रसिद्ध मुहावरा है। उदाहरण के लिए जब हम किसी विषय पर एक-दूसरे से संवाद कर रहे होते हैं, तो हम इसके मौखिक तुकबंदी, रूपक का प्रयोग हर घर में मिट्टी के चूल्हे के रूप में करते हैं।
कुछ शताब्दियों बाद हर घर में मिट्टी के चूल्हे शोध का विषय होंगे। ग्रामीण इलाकों में सिर्फ मिट्टी के चूल्हे ही मिलते हैं, और गैस चूल्हे के आने से ग्रामीण घरों या आंगन में लकड़ी के मिट्टी के चूल्हे कम ही देखने को मिलते हैं। इसलिए हर घर मिट्टी का चूल्हा वाली कहावत अब पुरानी हो रही है।
यह भी पढ़ें – फडणवीस की IIM-N कॉन्फ्रेंस में PM मोदी का शासन मॉडल, CM से सीधे होगी बात
पहले शहरी और ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के चूल्हे पर बड़ी मात्रा में खाना बनाया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रो में जंगल की प्रचुरता के कारण, जलावन के लिए लकड़ी आसानी से उपलब्ध थी। इसलिए चूल्हे पर खाना बनाना कम खर्चीला था।
हालांकि अब सरकार ने बड़ी मात्रा में गैस चूल्हे वितरित किए हैं। गैस की कीमत में भारी वृद्धि हुई है। इस वजह से खाना बनाना और भी महंगा हो गया है। चूंकि बड़े होटलों में चूल्हे पर बने खाने की मांग बढ़ रही है, इसलिए चूल्हे पर बना खाना भी महंगा हो गया है।