नागपुर: कोयले को ‘कचरा’ बताकर हेराफेरी का खेल, डुमरी साइडिंग पर CBI; रेलवे और वेकोलि की संयुक्त छापेमारी
Nagpur Coal Irregularity: नागपुर के डुमरी रेलवे साइडिंग पर 1,427 मीट्रिक टन कोयला कथित रूप से कचरा बताकर अलग रखने का मामला सामने आया है। सीबीआई, एसईसीआर और वेकोलि की संयुक्त जांच शुरू हुई है।
- Written By: अंकिता पटेल
कोयला हेराफेरी, सीबीआई जांच,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Coal Scam News: नागपुर कन्हान परिसर में स्थित डुमरी रेलवे साइडिंग पर बड़े पैमाने पर कोयले को कथित रूप से कचरा बताकर अलग रखने का मामला सामने आया है। इसकी जानकारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) नागपुर शाखा को मिली थी जिसके बाद सीबीआई सहित दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (एसईसीआर) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) की विजिलेंस टीमों द्वारा संयुक्त जांच की गई। रेलवे साइडिंग पर करीब 1,427 मीट्रिक टन कोयला कचरे के रूप में अलग करके डंप किया हुआ पाया गया। इसके बाद कोयले की कथित हेराफेरी और तस्करी की आशंका को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
संदेह है कि अनुचित लाभ लेने के लिए रेलवे के अधिकारियों द्वारा एक टेंडर जारी किया गया। सीबीआई सूत्रों की मानें तो डुमरी रेलवे साइडिंग पर कोयले की हैंडलिंग और निपटान प्रक्रिया में अनियमितताओं की सूचना मिली थी जिसके आधार पर यह संयुक्त जांच की गई। डुमरी साइडिंग पर वेकोलि की खदानों से आने वाले कोयले को रेलवे वैगनों में लोड कर विभिन्न ताप विद्युत परियोजनाओं तक भेजने का महत्त्वपूर्ण केंद्र है।
अधिकारियों के अनुसार रेलवे वैगन में कोयला लोड करने, संबंधित स्थान तक पहुंचाने और बाद में वैगन की सफाई करने का ठेका वेकोलि द्वारा टेंडर जारी कर कई वर्ष पहले दिया जा चुका था। वर्षों से इसी प्रक्रिया पर काम हो रहा था लेकिन नवंबर 2025 में अचानक एसईसीआर ने अलग ठेकेदार नियुक्त कर उसे रेलवे ट्रैक और बैगनों की सफाई की जिम्मेदारी सौंप दी।
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कोयला हेराफेरी की आशंका, CBI जांच में बड़े खुलासे के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई को सूचना मिली थी कि साइडिंग से कोयला डायवर्ट कर खुले बाजार में अवैध रूप से बेचा जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 21 मार्च को कोयले से भरे 4 टिप्पर साइडिंग से बाहर गए थे। इसके बाद 24 मार्च को 16 और टिप्पर निकले, अनुमान के हिसाब से इन टिप्परों में 800 मीट्रिक टन कोयला निकाला गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये वाहन कहां भेजे गए और किन परिस्थितियों में कोयले का परिवहन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन वाहनों को अवशिष्ट कोयले के नाम पर गेट पास जारी किए गए थे जिससे रिकॉर्ड में यह परिवहन वैध प्रतीत हो रहा था। इसी वजह से इस बात पर संदेह गहराया कि कचरे या अवशिष्ट सामग्री के रूप में वर्गीकृत कोयले का निपटान किस तरीके से किया जा रहा था।
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संयुक्त निरीक्षण के दौरान टीमों को ग्रेड-12 का करीब 1,427 मीट्रिक टन कोयला अलग कर कचरे के रूप में रखा हुआ मिला। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस कोयले को कचरा निपटान के नाम पर उठाने की तैयारी थी। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इससे लगभग 35 टिप्पर भरे जा सकते हैं और कीमत लगभग 30 लाख से ज्यादा है। जांच के तहत सीबीआई ने संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं तथा परीक्षण के लिए कोयले के 4 नमूने भी एकत्र किए हैं।
पूरी प्रक्रिया की बारीकी से की जा रही जांच
सूत्रों ने बताया कि फिलहाल मामला सत्यापन के चरण में है और कोयले की हैंडलिंग से जुड़ी पूरी प्रक्रिया, परिवहन रिकॉर्ड, गेट पास, ठेकेदारों की भूमिका और निपटान प्रणाली की बारीकी से जांच की जा रही है। वेकोलि ने 2 बार इस संबंध में एसईसीआर को पत्र लिखकर साइडिंग से कोयला उठाने वाले ठेकेदार की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। अब सवाल ये उठता है कि जब कोयला वेकोलि का है और परिवहन सहित सफाई का काम वेकोलि की निगरानी में ठेकेदार द्वारा किया जा रहा था तो एसईसीआर ने अचानक नई टेंडर प्रक्रिया लाकर दूसरा ठेकेदार क्यों नियुक्त किया? सत्यापन और परीक्षण प्रक्रिया की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
