‘लिनियर एक्सीलरेटर’ पर 3 सप्ताह में लें फैसला, मेडिकल की सड़कों की मरम्मत का भी आदेश

Nagpur Medical College: मेडिकल की दुर्दशा को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला लिया। राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 3 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
Nagpur Medical College: मेडिकल की दुर्दशा को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला लिया। राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 3 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
मेडिकल कॉलेज (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Nagpur Government Medical College: मेडिकल की दुर्दशा को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मेडिकल अस्पताल में कैंसर रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक ‘लिनियर एक्सीलरेटर’ मशीन की खरीद के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 3 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

गुरुवार को सुनवाई के बाद न्या. अनिल किलोर और न्या. रजनीश व्यास ने मेडिकल परिसर की सड़कों की मरम्मत का आदेश भी जारी किया। कैंसर के इलाज के लिए लिनियर एक्सीलरेटर मशीन की खरीद के लिए राज्य सरकार द्वारा पहले ही लगभग 25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि का प्रावधान किया जा चुका था। निविदा प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी लेकिन मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनी ने 100 प्रतिशत शुल्क अग्रिम में निधि की मांग की जिसके कारण यह पूरी प्रक्रिया रुक गई।

दायर करें शपथपत्र

हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे 3 सप्ताह के भीतर इस मामले में कोई निर्णय लें और न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करें, साथ ही मशीन लगाने की कार्यवाही अगले 6 महीनों के भीतर पूरी करने का आदेश भी दिया गया है। सुनवाई के दौरान यकृत, हृदय या गुर्दे से संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली टीडीएम मशीन का भी उल्लेख किया गया।

कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया कि लगभग पौने 4 करोड़ रुपये की निधि जिला नियोजन निधि से उपलब्ध होने के बावजूद भी यह मशीन लगाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मशीन को लेकर भी आवश्यक कदम उठाने और शपथपत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

मेडिकल की स्थिति पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने मेडिकल की वर्तमान स्थिति पर मौखिक नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि यहां की सुविधाएं सामान्य रोगियों के उपचार के लिए हैं। न्यायालय ने मेडिकल परिसर में उपलब्ध सुख-सुविधाओं की समीक्षा भी की। कोर्ट ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को परिसर की सड़कों की मरम्मत 2 सप्ताह के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है। इस मामले में न्यायालय मित्र के रूप पर अधि। अनूप गिल्डा तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील डीपी ठाकरे ने पैरवी की।

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