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125 साल की दुश्मनी खत्म, चिमठानावाला-मेहंदीबाग में ऐतिहासिक सुलह, सिर्फ 14 दिन में सुलझा विवाद

Mehendibagh Dispute Settlement: 4,000 करोड़ की संपत्ति और 125 साल पुराना चिमठानावाला-मेहंदीबाग विवाद 14 दिनों में सुलझा। आयोग ने दो सुनवाइयों में कराया ऐतिहासिक समझौता।

  • By प्रिया जैस
Updated On: Nov 13, 2025 | 02:16 PM

चिमठानावाला- मेहंदीबाग मामले में सुलह (सौजन्य-नवभारत)

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4000 Crore Property Dispute: महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने एक ऐतिहासिक मध्यस्थता करते हुए 125 साल पुराने चिमठानावाला बनाम मेहंदीबाग विवाद को महज 14 दिनों में सुलझा दिया। खास बात यह है कि अदालत में इस मामले की सुनवाई देश के नामी जजों ने की और वरिष्ठ वकीलों ने पैरवी की थी। इसके बाद भी मामले का कोई समाधान नहीं निकला। आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने केवल 2 सुनवाइयों में दोनों पक्षों मे आपसी समझौता कराया।

मेहंदीबाग संस्थान के 73 सदस्यों ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें अब्दे अली चिमठानावाला और अन्य पर धार्मिक, आर्थिक और व्यक्तिगत अधिकारों के हनन के आरोप लगाए गए थे। अध्यक्ष खान ने पक्षकारों की दलीलें सुनकर आपसी सुलह करने की पैरवी की जिसके बाद 21 जनवरी 2025 को दोनों पक्षों के बीच समझौता करार हुआ। जरूरी कागजी कार्यवाही के पूर्ण कर आयोग ने 11 नवंबर 2025 को अंतिम ऑर्डर जारी किया है।

मेहंदीबाग और चिमठानावाला विवाद की पृष्ठभूमि

विवाद की जड़ 19वीं सदी में है। 1840 में दाऊदी बोहरा जमात के 46वें दाई सैयदना बदरुद्दीन साहब के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर मतभेद हुआ। कुछ सदस्य नजमुद्दीन को 47वां दाई मानने को तैयार नहीं थे। इसी विवाद को लेकर वर्ष 1891 में मौलाना मलक साहब और उनके अनुयायियों ने नागपुर में अतबा-ए-मलक जमात और मेहंदीबाग संस्थान की स्थापना की।

1899 में मौलाना मलक साहब के निधन के बाद संस्थान 2 हिस्सों (मेहंदीबाग व चिमठानावाला) में विभाजित हो गया। एक पक्ष (मेहंदीबाग) ने मौलाना बदरुद्दीन गुलाम हुसैन मलक साहब को धार्मिक प्रमुख माना, जबकि दूसरा (चिमठानावाला) मौलाना अब्दुल कादर चिमठानावाला को अपना नेता मानता रहा।

इसी मतभेद के कारण मौलाना अब्दुल कादर चिमठानावाला और उनके अनुयायी (कुल 13 व्यक्ति) मेहंदीबाग छोड़कर इतवारी रेलवे स्टेशन के पास बस गए। इसके बाद उत्तराधिकार के मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद छिड़ा। समय के साथ दोनों जमातों के संबंध बिगड़ते गए।

4,000 करोड़ का विवाद

इस विवाद में मौलाना मलक साहब की देशभर में फैली 4,000 करोड़ रुपए की सम्पत्तियों का बंटवारे का विवाद प्रमुख था। इसके आलावा दोनों पक्ष एक दूसरे पर कई आरोप लगाते रहे। इनमें धर्म और पवित्र ग्रंथों का अपमान, रमजान में इस्लाम विरोधी बयानबाजी, संत और उत्तराधिकारी के नाम पर धोखाधड़ी व धन संग्रह, जातीय तनाव फैलाकर दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न करना, समुदाय को धमकी व झूठी शिकायतें दर्ज कराना, संपत्ति और सार्वजनिक निधि का दुरुपयोग करना आदि हैं।

नामी अधिवक्ताओ ने की पैरवी

उच्च न्यायालय में मेहंदीबाग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसजी घाटे, एसए बोबड़े, ज़ेडए हक, एएस चांदूरकर, एसएस अद्कर, आरजे मिर्ज़ा, एनए खान, एमआई खान, एमपी पितले और एनडब्ल्यू सांबरे ने पैरवी की। वहीं चिमठानावाला परिवार का पक्ष रखने के लिए पीजी पालशिकर, जीडी सुले, एसवी मनोहर, वीआर मनोहर, एए नाईक, वीएम देशपांडे, एसए खान और जीडी शेख जैसे नामी वकील अदालत में पेश हुए।

यह भी पढ़ें – US के लिए एक्सपोर्ट हब बना नागपुर, तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड, पार हो गया 22 हजार करोड़ का आंकड़ा

सुप्रीम कोर्ट में भी दोनों पक्षों ने शीर्ष वकीलों को खड़ा किया। चिमठानावाला परिवार की ओर से सोली सोराबजी, एंड्यारुजिना, सी. सुंदरम और रोहिंगटन नरिमन ने पैरवी की, जबकि मेहंदीबाग की ओर से फली नरिमन, कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम, परमिंदर सिंह पटवालिया, अतुल सेतलवाद, उदय ललित, केके वेणुगोपाल, गोपाल सुब्रमण्यम, एमएन कृष्णमणि और फ़ख़रुद्दीन जैसे दिग्गज अधिवक्ता अदालत में उतरे।

दोनों पक्षों के बीच ऐतिहासिक समझौता

  • 21 जनवरी 2025 को दोनों जमातों के प्रतिनिधियों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का निर्णय लिया।
  • स्पेशल सिविल सूट नं. 143/1967 में सूचीबद्ध संपत्तियां मेहंदीबाग वक़्फ़ की मानी जाएंगी और मौलाना आमिरुद्दीन मलक साहब द्वारा प्रबंधित की जाएंगी।
  • मौलाना अब्दे अली चिमठानावाला 3 ट्रस्टों दाऊदी अतबा-ए-मलक वक़ील, अतबा-ए-हुमायूं और बैतूल अमन का संचालन करेंगे।
  • दोनों जमातों के अनुयायी एक दूसरे के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
  • देशभर में लंबित मुकदमों को आपसी सहमति से वापस लिया जाएगा।

Chimthanawala mehendibagh dispute historic settlement after 125 years

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Published On: Nov 13, 2025 | 02:16 PM

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