Chhagan Bhujbal statement Nashik (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra NCP Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी के दोनों गुटों (अजित पवार और शरद पवार) के विलय को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लगता दिखाई दे रहा है। शनिवार को शरद पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से विलय का विषय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। हालांकि, इसी दिन नाशिक में अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी।
महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार की दुर्घटना में मृत्यु के बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि उनके गुट का नेतृत्व कौन संभालेगा। इसी पृष्ठभूमि में दोनों गुटों के एकीकरण की चर्चा शुरू हुई थी। शरद पवार गुट का दावा था कि स्वयं अजित दादा विलय के पक्ष में थे, जबकि अजित पवार गुट के नेताओं ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई चर्चा कभी नहीं हुई। इन विरोधाभासी बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है।
राकांपा (शरद पवार) के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने पार्टी के मुखपत्र में एक लेख लिखकर दावा किया कि विलय के बाद पार्टी की कमान अजित दादा को सौंपी जानी थी। यह भी चर्चा थी कि 12 फरवरी को अजित पवार स्वयं विलय की आधिकारिक घोषणा करने वाले थे। इन तमाम दावों के बीच अब कद्दावर नेता छगन भुजबल ने इस विषय पर अपना पक्ष सामने रखा है।
शनिवार को नाशिक में मीडिया से बातचीत करते हुए छगन भुजबल ने विलय को लेकर रोज हो रही चर्चाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विलय को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। यह आज हो सकता है, एक महीने में या दो महीने में भी। केवल अटकलों के आधार पर बयान देने का कोई अर्थ नहीं है।
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उन्होंने आगे कहा कि अब नई ‘कैप्टन’ सुनेत्रा पवार इस मामले को देखेंगी। वह विधायकों के साथ बैठक करेंगी और सभी वरिष्ठ नेता मिलकर इस पर विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कोई बोर्ड या दफ्तर नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के पसीने से खड़ा हुआ संगठन है।
मंत्री भुजबल ने सुनेत्रा पवार की भविष्य की भूमिका को लेकर बड़ा संकेत देते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला है और जल्द ही उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जा सकता है। इसके बाद वे प्रमुख नेताओं के साथ बैठकर विलय के मुद्दे पर चर्चा करेंगी। नया नेतृत्व आया है, इसलिए उन्हें पहले काम समझने और स्थिर होने का समय दिया जाना चाहिए, उसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।