डॉलर से बिटकॉइन तक..काला धन ऐसे होता था सफेद! संभाजीनगर में साइबर ठगी के इंटरनेशनल नेटवर्क का खुलासा

Chhatrapati Sambhajinagar में पकड़े गए अवैध कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों से ठगी कर डॉलर को बिटकॉइन व फर्जी कंपनियों से सफेद किया जाता था। मास्टरमाइंड जॉन विदेश में, राजवीर-बलबीर वर्मा मुख्य आरोपी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Bitcoin Scam: छत्रपति संभाजीनगर में उजागर हुए अवैध कॉल सेंटर की जांच में पुलिस को मिले सुराग अब राज्य और देश के बाहर तक पहुंच गए हैं। पुलिस ने चौंकाने वाली जांच शुरू की है कि इस कॉल सेंटर के जरिए अमेरिकी नागरिकों से ठगी करके प्राप्त डॉलर की रकम को बिटकॉइन और फर्जी कंपनियों के जरिए काले धन से सफेद धन में बदला जाता था।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड जॉन विदेश से ही काम करता है गिरफ्तार आरोपी अब्दुल फारूक मखदूम शाह ने कबूल किया है कि उसके निर्देश पर छत्रपति संभाजीनगर में यह कॉल सेंटर शुरू किया गया था। उसके बाद राजवीर प्रदीप वर्मा और उसके चाचा बलबीर वर्मा उर्फ पाजी का नाम सामने आया है और पता चला है कि जॉन के बाद यही जोड़ी मुख्य आरोपी है।

आरोपी राजवीर प्रदीप वर्मा जिसे हाल ही में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, को पुलिस ने जेल से वापस लाकर शनिवार, 1 नवंबर को गिरफ्तार कर लिया। बलबीर वर्मा फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

सिंधी नगर में तैयार किया था कॉल सेंटर का सेटअप

संभाजीनगर के इस मामले का तार दो साल पहले पंजाब के मोहाली में पुलिस द्वारा पकड़े गए बड़े कॉल सेंटर घोटाले से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। मोहाली में 155 लोगों की गिरफ्तारी वाले मामले में बलबीर वर्मा का नाम पहले ही सामने आ चुका था। अब खुलासा हुआ है कि उसी बलबीर ने अब अपने भतीजे राजवीर वर्मा को आगे बढ़ाकर छत्रपति संभाजी नगर में एक और शाखा खोली थी। राजवीर के चाचा बलबीर जॉन के सीधे संपर्क में थे। यही बलबीर अहमदाबाद होते हुए शहर आया, सिंधी कॉलोनी में पूरी इमारत किराए पर ली और कॉल सेंटर का पूरा सेटअप तैयार किया। आरोपी सतीश लाड सभी तकनीकी पहलुओं के लिए जिम्मेदार था। पुलिस ने बताया कि उसे नेटवर्किंग और हार्डवेयर की पूरी जानकारी थी।

काले धन की हेराफेरी का गुप्त लेन-देन

छत्रपति संभाजीनगर पुलिस जांच के अनुसार, अमेरिकी नागरिकों से धोखाधड़ी करके प्राप्त धन को पहले बिटकॉइन में बदला जाता था। इसके बाद, राजवीर की अहमदाबाद स्थित कंपनियों के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में धनराशि जमा की जाती थी।

इस लेन-देन में हवाला रैकेट का इस्तेमाल किया गया था। पता चला है कि राजवीर ने खुद इस कॉल सेंटर में लगभग 50 लाख रुपये का निवेश किया था। ये सभी लेन-देन वर्चुअल आईडी और डार्क नेट के माध्यम से किए गए थे।

पुलिस ने भादेश चौधरी के पलैट से 14 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 64,880 रुपये नकद जब्त किए, लैपटॉप की जाँच के दौरान पुलिस को 16 अमेरिकी नागरिकों की जानकारी, फर्जी लेटर हेड, अदालती आदेश, सरकारी प्रतीक और धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर मिले। जॉन इन सभी को डेटा मुहैया करा रहा था, बलबीर और राजवीर टीम के समन्वयक था, जबकि फारूक स्थानीय व्यक्ति के रूप में कॉल सेंटर चला रहा था।

14 विदेशी नागरिकों की जानकारी मांगी

राजवीर के लैपटॉप से 14 विदेशी नागरिकों की जानकारी मिली है। इन नामों में एन स्पलिंग, क्रिस्टोफर चैपल, डेविड मिलर, डोनिट गिलमोर, हेसबर्ट विल्सन, इरिस विल्बर्न, जेन कॉलहॉन, जेनेट क्रूज, जूलिया चंडफोर्ड, कीथ फूटी, लिसा अडरसन, स्टीफन पेरोक्लीसिस, रॉबर्ट रैनकिन और पॉल लाक्रोही शामिल हैं।

इन सभी नागरिकों के इस धोखाधड़ी के शिकार होने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि इन व्यक्तियों के बारे में जानकारी मांगने के लिए अमेरिकी एफबीआई को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। पता चला है कि इस मामले में कई राज्यों के आरोपी शामिल हैं।

गौरतलब है कि बलबीर और राजवीर के रिश्तेदार पंजाब, महाराष्ट्र और अहमदाबाद सहित विदेशों में रहते हैं। उनमें से कुछ लोग फर्जी कॉल सेंटर चलाने में मदद करते हैं। जाँच के दौरान ऐसी जानकारी भी सामने आई है।

यह व्यक्ति इस रैकेट को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा था। पुलिस के अनुसार, यह केवल कॉल सेंटर धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि काले धन को सफेद करने का एक संगठित उद्योग है।

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