70 करोड़ डकार गए, फिर भी मिले रेत घाट! अनोज कुमार अग्रवाल के ‘काले कारोबार’ पर विधायक मोहन मते का बड़ा प्रहार
Brahmapuri Sand Scam: ब्रम्हपुरी रेत घोटाले में सीएम फडणवीस का बड़ा एक्शन! चंद्रपुर कलेक्टर को खुद जांच के आदेश। 70 करोड़ का बकाया होने के बावजूद अनोज कुमार अग्रवाल को मिले घाट।
- Written By: प्रिया जैस
रेत घोटाला (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Mohan Mate MLA Complaint: विदर्भ में रेत की भरपूर किल्लत को देखते हुए रेत कारोबारी जमकर लाभ उठा रहे हैं। रेत कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि सरकारी पैसे तक नहीं भर रहे हैं और सरकारी अधिकारी उस कारोबारी को एक के बाद एक मदद पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
दिसंबर में यह मामला उठा, फिर बजट सत्र में मामला प्रवीण दटके ने उठाया और अब विधायक मोहन मते ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस प्रकरण की पूरी जांच की मांग कर दी है जिसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने चंद्रपुर कलेक्टर को खुद जांच कर रिपोर्ट देने का सख्त आदेश दिया है।
आश्चर्य की बात यह है कि उक्त कारोबारी को 70 करोड़ रुपये सरकार को देना है लेकिन उसे ‘मौके पर मौके’ दिए जा रहे हैं। विधानसभा में हुई कार्रवाई की घोषणा भी खाली जा रही है।
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70 करोड़ नहीं भरा
आश्चर्य इस बात है कि इसी कारोबारी अनोज कुमार अग्रवाल का ब्रम्हपुरी के साथ ही भंडारा के पवनी में रेत घाट है। इस रेत घाट पर कारोबारी पर लगभग 70 करोड़ रुपये का दंड एवं अन्य बकाया है। इसके वसूली के लिए सरकारी तंत्र हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वर्षों से बकाया राशि की वसूली के लिए कोई पहल नहीं की गई है।
इससे उनके हौसले बुलंद हो गए हैं। जानकारों कीं माने तो 70 करोड़ की राशि उन पर बकाया है और इतनी ही राशि उनके कारण सरकार को चपत भी लगी है। इस मुद्दे की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी गई लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अब ब्रम्हपुरी में 18.38 करोड़ का खेल
मते ने अपने पत्र में कहा है कि बड़ी राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं करने वाले अग्रवाल को ब्रम्हपुरी में 13 खदानें दी गईं। बिना रायल्टी अग्रवाल ने लगभग रेत का परिवहन किया और सरकार को 18.38 करोड़ रुपये का चूना लगाया। यह मामला लगभग 300 करोड़ रुपये का हो सकता है।
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आश्चर्य की बात यह है कि चंद्रपुर के खनिकर्म अधिकारी रोहन ठवरे सहित जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकारी अग्रवाल के पक्ष में निर्णय ले रहे हैं और एक के बाद एक ‘मौका’ दे रहे हैं। नियम के अनुसार कलेक्टर को छोड़कर कोई भी अधिकारी अवधि बढ़ाने का मंजूरी नहीं दे सकता है लेकिन यहां पर मामला अलग ही दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि इस प्रकरण की जांच गंभीरता और समयबद्धता के साथ होना जरूरी हो गया है।
बावनकुले ने दिया था आश्वासन
इस मुद्दे को शीतकालीन सत्र के दौरान विधायक ने उठाया था और दावा किया था कि मामला 1000 करोड़ के रुपये का गोलमाल बताया गया था। इसके बाद राजस्व मंत्री बावनकुले ने जांच करने का आदेश दिया था। मंत्री के आदेश के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई और यह मामला बढ़ता चला गया। अब इस मामले को कई विधायक विधानसभा में उठा चुके हैं।
