भाजपा नेता संदीप जोशी व सीएम देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sandeep Joshi Political Retirement News: महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव में भारी जीत के ठीक तीसरे दिन भाजपा को नागपुर में बड़ा झटका लगा। एक नाटकीय घटनाक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खास मित्र पूर्व मेयर और विधान परिषद के सदस्य संदीप जोशी ने राजनीतिक संन्यास की घोषणा कर दी। इससे उनके समर्थकों में हड़कंप मच गया है। फेसबुक पर उन्होंने ‘अब मुझे रुकना है…’ हेडिंग है, लंबा पोस्ट डाला। उनके इस निर्णय पर कई राजनीतिक कारण भी समझ में आ रहे हैं।
संदीप जोशी ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि सत्ता के लिए पार्टी बदल और अवसरवादिता निष्ठावान कार्यकर्ताओं को ठोस पहुंचा रही है। चुनाव जीतने के लिए बाहर से नेताओं को लाने और उन्हें महत्वपूर्ण पद व सम्मान देने का चलन बढ़ गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बढ़े और पार्टी के लिए संघर्ष करने वालों को साइड किया जा रहा है। उनके यह वाक्य पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का दर्द बयान कर रहा है। उन्होंने यह भी लिखा है कि मेरी उम्र 55 हो गई है और अब नई पीढ़ी के लिए जगह बनाने के लिए हट रहा हूं। पार्टी के ही अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता दबी जुबान कह रहे हैं कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की आवाज जोशी ने उठाई है।
… आता मला थांबायचंय ! नमस्कार, हे पत्र लिहिण्याचा निर्णय सहज घेतलेला नाही. राजकारण ही माझ्यासाठी नेहमीच पद किंवा प्रतिष्ठेपेक्षा वेगळी, समाजसेवेची आणि निष्ठेची वाट होती. मात्र आज सत्तेसाठी सुरू असलेले पक्षांतर, संधीसाधूपणा आणि वाढलेली स्पर्धा सामान्य मतदारांसह निष्ठावान… pic.twitter.com/bCZHrahBt1 — Sandip Joshi (@SandipJoshiNGP) January 19, 2026
पत्र में संदीप जोशी ने अपने निर्णय के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व सीएम देवेंद्र फडणवीस से माफी भी मांगी है। बता दें कि जोशी महापौर थे। 2 बार स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन पद भी पार्टी ने दिया। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की उम्मीदवारी भी दी गई थी। सीएम राज्यभर में व्यस्त रहते हैं। इसलिए जोशी को उन्होंने दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का पालकत्व सौंपा था। जब देवेंद्र ढाई वर्ष डीसीएम थे तब जोशी उनके मानद सचिव थे। वे विधान परिषद सदस्य हैं। उनका कार्यकाल 13 मई को समाप्त हो रहा है।
जोशी की नाराजगी के पीछे कोई बड़ा कारण बताया जा रहा है। उन्होंने 13 मई के बाद अगर उन्हें विधान परिषद सदस्यता दी गई तो स्वीकार नहीं करने की भावना जताई है। वे अब किसी पद पर कार्य नहीं करना चाहते लेकिन अपना सांस्कृतिक व सामाजिक सेवा का कार्य जारी रखेंगे। यह भी बता दें कि वे मनपा चुनाव में नितिन गडकरी के ‘पोहा-चना गप्पा’ कार्यक्रम के अलावा प्रचार में कहीं नजर नहीं आए। एक चर्चा यह भी है कि जोशी के करीबी कार्यकर्ता को पार्षद की टिकट नहीं देने से वे नाराज थे। पत्र के अंत में उन्होंने लिखा है-कुर्सी नहीं, कीमत बचाने चला हूं।
संदीप जोशी ने कहा कि मेरे निर्णय से कार्यकर्ताओं में बेचैनी है। वे निर्णय वापस लेने की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ता 25 जनवरी को सीएम फडणवीस से इस संदर्भ में चर्चा करने वाले हैं लेकिन मैंने अपना निर्णय ले लिया है जिस पर कायम रहूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मैं सीएम का बचपन का दोस्त हूं और उनसे झगड़ा भी कर सकता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि कल ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में नई पीढ़ी के लिए जगह खाली करने की बात कही है। कोई रुकने को तैयार नहीं है लेकिन मैंने अपना निर्णय ले लिया है।