Nagpur News: महाबोधि महाविहार मुक्ति के लिए भदंत ससाई का PM मोदी को ज्ञापन, दीक्षाभूमि सौंदर्यीकरण का भी उठाया मुद्दा
दिक्षाभुमी स्मारक समिती की ओर से PM मोदी को दो मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इसमें दीक्षा स्थल के विस्तार के लिए पड़ोसी भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध, तथा महाबोधि महाविहार मुक्ति के संबंध में भी मांग की गई।
- Written By: आंचल लोखंडे
भदंत सुरई ससाई का पीएम मोदी को ज्ञापन। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की अस्थियों के दर्शन किए। मोदी ने भगवान गौतम बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने दीक्षा भूमि पर 15 मिनट बिताए। इस अवसर पर दीक्षाभूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष भदंत नागार्जुन सुरई ससाई सहित भंते उपस्थित थे। स्मारक समिति ने मोदी को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। मोदी को दीक्षाभूमि का प्रतिनिधित्व करने वाली एक स्वर्ण प्रतिमा भेंट की गई।
स्वागत समारोह के बाद समिति की ओर से मोदी को दो मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इसमें दीक्षा स्थल के विस्तार के लिए पड़ोसी भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध, तथा महाबोधि महाविहार मुक्ति के संबंध में भी मांग की गई। बता दें कि बिहार के महाबोधी महाविहार के मुक्ती का आंदोलन लगातार चल रहा है। समिति के राजेंद्र गवई ने बताया कि भदंत नागार्जुन सुरई ससाई ने मोदी को एक ज्ञापन सौंपा।
कई वर्षों से लंबित है मांग
विश्व प्रसिद्ध स्मारक दीक्षाभूमि के सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य के लिए स्थान अपर्याप्त होता जा रहा है। इस स्मारक को पर्यटन का दर्जा दिया गया है। पिछले कई दिनों से कपास अनुसंधान केंद्र की 5 एकड़ और स्वास्थ्य विभाग की 16 एकड़ जमीन डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर स्मारक समिति को दीक्षाभूमि देने की मांग कई वर्षों से की जा रही है। कुछ संगठनों और दलों ने मांग की थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के दौरान इस मांग पर विचार करें। स्मारक समिति ने पहल करते हुए इस संबंध में सीधे मोदी को एक ज्ञापन सौंपा।
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पिछले साल रोक दिया भूमिगत पार्किंग का काम
यह भारतीय संविधान का 75वां वर्ष है। वह संविधान जिसके द्वारा देश एकजुट है। उसी संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अमानवीय जीवन जी रहे लाखों अनुयायियों को 14 अक्टूबर 1956 को मानवतावादी बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। बाबासाहेब आंबेडकर का स्मारक उसी 14 एकड़ के स्थान पर बना हुआ है। पिछले साल भूमिगत पार्किंग गैराज के नाम पर जगह की कमी के कारण खराब योजना के चलते 200 करोड़ रुपये के सौंदर्यीकरण और विकास कार्य को 1 जुलाई 2024 को रोक दिया गया था।
Nagpur, Maharashtra: Deekshabhoomi Trust President Bhadant Arya Nagarjuna Shurei Sasai says, “…PM Modi visited here for the second time. I took him to Dr. Babasaheb Ambedkar’s memorial, where he offered flowers, bowed his head in reverence, and participated in a collective… pic.twitter.com/yGGiGnFN33 — IANS (@ians_india) March 30, 2025
दीक्षाभूमि के पूर्व और उत्तर में भूमि अधिग्रहण
तब से, कई लोगों ने सरकारी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर दीक्षाभूमि स्मारक के पूर्व और उत्तर में भूमि अधिग्रहण करने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए। दीक्षाभूमि से सटी भूमि के आवंटन के संबंध में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में एक याचिका भी दायर की गई है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है।
ज्ञापन में क्या कहा गया
ज्ञापन में कहा गया कि बोधगया विश्व के सभी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक पवित्र स्थान है। यहीं पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस महाविहार का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था। वहां 1949 के बीटी एक्ट को निरस्त किया जाना चाहिए और महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को सौंप दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, दीक्षा स्थल पर आने वाले अनुयायियों के लिए जगह कम होती जा रही है। भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बयान के माध्यम से अनुरोध किया गया कि कपास अनुसंधान केंद्र, माता कचेरी में 21 एकड़ जमीन दीक्षाभूमि को दी जानी चाहिए। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राज्य की मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, स्मारक समिति के सदस्य विलास गजघाटे, डॉ. राजेंद्र गवई, आनंद फुलझेले, एन.आर. दादाराव दाभाड़े भी उपस्थित थे।
