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AIIMS नागपुर में बढ़ती आत्महत्याएं! 2 UG, 1 PG स्टूडेंट ने दी जान, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

AIIMS Student Suicide Case: एम्स नागपुर में अब तक 2 UG और 1 PG छात्र की आत्महत्या हो चुकी है। सर्वे के अनुसार 73.9% छात्रों पर लिपिकीय बोझ और स्टाफ की भारी कमी तनाव बढ़ा रही है।

  • By प्रिया जैस
Updated On: Nov 15, 2025 | 12:59 PM

नागपुर एम्स (सौजन्य-सोशल मीडिया)

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AIIMS Nagpur Suicides: इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में निवासी डॉक्टरों पर काम का बोझ होने से उनमें तनाव जैसी समस्या बढ़ती जा रही है। इस संबंध में पिछले वर्ष राज्य सरकार ने छात्रों सहित निवासी डॉक्टरों की समय-समय पर काउंसिलिंग करने, उनके मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए ‘छात्र मानस कक्ष’ की स्थापना भी की थी लेकिन इसका बहुत ज्यादा लाभ नहीं मिल रहा है।

भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निवासी डॉक्टर की आत्महत्या ने व्यवस्था पर एक बार भी कई सवाल खड़े कर दिये हैं। एम्स में स्थापना के बाद से अब तक कुल 3 आत्महत्याएं हुई हैं। इनमें 2 स्नातक और 1 स्नातकोत्तर छात्रा का समावेश है। इसी क्रम में अब तक 3-4 छात्रों ने आत्महत्या का प्रयास भी किया था।

रिव्यू मेडिकल सिस्टम सर्वेक्षण के परिणाम

पिछले दिनों फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने पूरे भारत में किए गए रिव्यू मेडिकल सिस्टम सर्वेक्षण के परिणाम जारी किए थे। इनमें पाया गया था कि 29.5 फीसदी छात्रों के काम का समय अनिश्चित है। वहीं 73.9 फीसदी छात्रों पर लिपिकीय कार्य का भारी बोझ है। 55.2 फीसदी ने कर्मचारियों की कमी बताई थी। इस वजह से उपचार के साथ ही अन्य दस्तावेजी काम भी निवासी डॉक्टरों को करना पड़ता है।

‘मानस कक्ष’ स्थापित करने की पहल

2024 में राज्य सरकार ने वैद्यकीय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘छात्र मानस योजना’ संचालित करने के निर्देश दिये। इसके तहत ‘मानस कक्ष’ स्थापित करने की पहल की गई लेकिन अधिकांश कॉलेजों में छात्र मानस कक्ष को लेकर अच्छा प्रतिसाद नहीं है। बहुत कम छात्रों की काउंसिलिंग होती है। काम का बोझ इतना अधिक होता है कि कई बार निवासी डॉक्टर सहित छात्र नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। सबसे अधिक दिक्कतें जेआर-1 और 2 को होती है। वार्ड की जिम्मेदारी के साथ ही अन्य कामकाज भी करना पड़ता है।

  • 73.9 फीसदी छात्रों पर लिपिकीय कार्य का बोझ
  • 55.5 फीसदी ने बताया कर्मचारियों की कमी
  • 4 एम्स के छात्रों ने किया आत्महत्या का प्रयास

छात्र मानस योजना का योग्य क्रियान्वयन नहीं

एम्स जैसे संस्थान में प्रवेश मिलना यानी छात्रों के लिए सपने साकार होने जैसा होता है। इसके बाद भी यदि छात्र और निवासी डॉक्टर तनाव को सहन करते हुए आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं तो यह बेहद गंभीर है। एम्स की स्थापना के बाद से 2 स्नातक विद्यार्थी और 1 निवासी डॉक्टर ने आत्महत्या की है। वहीं 3-4 विद्यार्थियों ने आत्महत्या का प्रयास किया है।

यह भी पढ़ें – सब पहले से फिक्स था…बिहार में मिली हार पर बोला MVA, कहा- डेढ़ घंटे में बदली तस्वीर

समय रहते इन छात्रों की काउंसिलिंग की गई वरना अनर्थ हो जाता। एफएआईएमए के मुख्य सलाहकार डॉ. सजल बंसल ने बताया कि राज्य में मेडिकल छात्रों की आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। शासन के अध्यादेश के अनुसार प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में ‘छात्र मानस योजना’ के अंतर्गत 2 मेंटल हेल्थ काउंसलर नियुक्त करना आवश्यक है।

साथ ही छात्र मानस कक्ष के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए लेकिन देखने में आ रहा है कि योजना का योग्य क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इस ओर गंभीरता से ध्यान देते हुए मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपाय योजना आवश्यक है।

Aiims nagpur student suicides cases stress workload survey

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Published On: Nov 15, 2025 | 12:59 PM

Topics:  

  • AIIMS Nagpur
  • Maharashtra
  • Nagpur

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