नागपुर में आचार्य प्रशांत का पहला सार्वजनिक सत्र
Nagpur Acharya Prashant Public Session News: ऑरेंज सिटी नागपुर की धरती पर 9 अप्रैल को आचार्य प्रशांत का पहला सार्वजनिक सत्र अभूतपूर्व उत्साह के साथ संपन्न हुआ। महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए। सत्र शुरू होने से करीब दो घंटे पहले ही लोग स्थल पर पहुंचने लगे, जिससे आचार्य प्रशांत के प्रति उनकी गहरी रुचि और उत्साह साफ झलक रहा था।
सत्र के दौरान आचार्य प्रशांत ने अष्टावक्र गीता के श्लोक 14.2 की गहन व्याख्या करते हुए कहा कि ‘आत्मा’ का विचार भी अहंकार के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि अहंकार के समाप्त होते ही ‘आत्मा’ का कोई अलग अस्तित्व नहीं रह जाता। गुरु और साधक के संबंध पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची आध्यात्मिक प्रगति नकल से नहीं, बल्कि शून्यता और मौन में स्थित होकर ही संभव है।
उन्होंने धन और संसाधनों के सही उपयोग पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, धन तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति को आंतरिक स्वतंत्रता की ओर ले जाए। वास्तविक धर्म न तो संग्रह में है और न ही त्याग में, बल्कि इस बात में है कि धन का उपयोग करने वाला कौन है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म का उद्देश्य अहंकार को बचाना नहीं, बल्कि उसे समाप्त करना है।
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कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में लोग आचार्य प्रशांत से मिलने, उनके साथ तस्वीरें लेने और आभार व्यक्त करने के लिए उमड़े। इस सत्र को दुनियाभर से 1 लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन भी देखा, जो उनके व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
नागपुर आगमन से पहले आचार्य प्रशांत ने उत्तराखंड का दौरा किया, जहां उन्होंने मसूरी इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधित किया और दून बुक फेस्टिवल में भाग लिया।
आगामी 10 और 11 अप्रैल को वे IIIT नागपुर और VNIT नागपुर में छात्रों के साथ विशेष संवाद सत्र करेंगे। हाल के समय में उन्होंने IITs, IIMs, AIIMS और IISc जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हजारों युवाओं से संवाद किया है।