युग, कुश, जीत से लेकर अथर्व तक, नागपुर के वो 4 हत्याकांड जिनसे आज भी सिहर उठता है शहर

Nagpur Children Murder News: नागपुर में अथर्व नानोर हत्याकांड ने फिर ताजा किए पुराने जख्म। जानें कुश, युग और जीत जैसे मासूमों की हत्याओं की खौफनाक दास्तान जिसने शहर को दहला दिया था।
Atharva Nanore murder case in Nagpur brings back haunting memories of Kush, Yug, and Jeet. Read the chilling history of child kidnappings and murders in Nagpur.
अथर्व नानोरे-जीत सोनेकर-युग चांडक-कुश कटारिया (सौजन्य-नवभारत और सोशल मीडिया)
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Nagpur Crime History: नागपुर में अथर्व नानोरे हत्याकांड ने एक बार फिर उन मासूमों की मौत के उस भयानक मंजर की यादें ताजा कर दी हैं। एक ऐसी त्रासदी जिसे यह शहर भुलाने की कोशिश कर रहा था। अथर्व ननोर की हत्या कोई पहला ऐसा अपराध नहीं है जिसने आज इस शहर को आंसुओं में डुबो दिया हो।

अतीत में भी इसी तरह की हत्याएं की गई हैं, जिनमें निजी स्वार्थ के लिए मासूम बच्चों को निशाना बनाया गया और बेहद क्रूरता के साथ उनकी जान ले ली गई। आज, अथर्व हत्याकांड ने नागपुर को कुश, युग और जीत की याद दिला दी है। जिनके खोने के दुख से नागपुर शहर अभी तक उबर नहीं पाया है।

अथर्व नानोरे हत्याकांड 2026

नागपुर के गिट्टीखदान इलाके में हनुमान जयंती के जुलूस के दौरान, 9वीं क्लास का एक मासूम 14 साल का छात्र, अथर्व नानोरे, लापता हो गया। अथर्व के लापता होने से इलाके में भारी हड़कंप मच गया। विरोध में, स्थानीय लोगों ने इलाके को बंद करने की मांग की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। घटना के 42 घंटे बाद, उसका शव भारतवाड़ा बाईपास पर, कलमेश्वर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में मिला।

शव की जांच से इस बात का पक्का संकेत मिला कि अपहरणकर्ताओं ने पहले अथर्व का गला घोंटकर उसकी हत्या की थी; उसके गले पर चोट के निशान साफ ​​दिखाई दे रहे थे। इसके बाद, उसके हाथ-पैर बांध दिए गए, शव को एक बोरे में ठूंस दिया गया, और उसे भारतवाड़ा बाईपास के पास फेंक दिया गया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

Atharva Nanore murder case in Nagpur brings back haunting memories of Kush, Yug, and Jeet. Read the chilling history of child kidnappings and murders in Nagpur.
अथर्व नानोरे हत्याकांड (सौजन्य-नवभारत)

जांच में पता चला कि आरोपियों पर अथर्व के पिता का कुछ पैसा बकाया था, और उन्होंने पैसों के लालच में अपहरण और हत्या की इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों की पहचान जयराम गोपाल यादव (19), केतन उर्फ ​​कुणाल रमेश साहू (22), और आयुष मोहन साहू (19) के रूप में हुई है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

जीत सोनेकर हत्याकांड 2025

खापरखेड़ा स्थित शंकरराव चव्हाण इंग्लिश स्कूल में कक्षा 6वीं में पढ़ने वाले 11 वर्षीय छात्र जीत का फिरौती मांगने के इरादे से अपहरण किया गया, लेकिन जैसे ही मामला बिगड़ता दिखा तो आरोपियों ने उसकी बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी। यह घटना 15 सितंबर को स्थानीय थाना क्षेत्र के चनकापुर इलाके में सामने आई।

मृतक छात्र का नाम जीत युगराज सोनेकर (11), चनकापुर वेकोलि कॉलोनी निवासी बताया गया। पुलिस जांच में पता चला है कि इन सभी मामलों का मास्टरमाइंड मृतक छात्र का पड़ोसी है। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपी राहुल पाल (32), यश वर्मा (21) और अरुण भारती (22) को गिरफ्तार किया।

जानकारी अनुसार जीत सोनेकर सोमवार 15 सितंबर को हमेशा की तरह स्कूल आया था। शाम की छुट्टी के बाद, वह घर जाने के लिए बस स्टाप के पास गया। इस बार उसके कुछ दोस्त बस से गए, लेकिन वह बस में नहीं गया। इसी बीच, जब वह पैदल अपने घर की ओर जा रहा था, तो घटना के मास्टरमाइंड राहुल पाल, आरोपी यश वर्मा व अरुण भारती ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर मटन मार्केट के पास कार क्र. एमएच-40-ए-7997 को रोककर उसे बिठा लिया। वह राहुल और अन्य दो आरोपियों को जानता था इसलिए उनकी कार में बैठ गया इसके बाद आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया।

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जीत सोनेकर हत्याकांड (सौजन्य-नवभारत)

दो दिनों की जांच के बाद भी पुलिस को कुछ नहीं मिला। दो दिन बाद सुबह लगभग 6 बजे अपने कुत्ते को ले जा रहे एक व्यक्ति ने चनकापुर कॉलोनी से सटी एक झाड़ी में जीत का शव देखा। घटना की सूचना खापरखेड़ा पुलिस को दी गई। पता चला कि 15 सितंबर को जीत का अपहरण करने के बाद जीत को लेकर आरोपी कोराडी, वारेगांव, भानेगांव आदि जगह पर घूमाते रहे।

इस दौरान, आरोपी अन्नामोड़, चनकापुर की ओर गए और बंद पड़ी एबी इंक्लाइन कोयला खदान के सुनसान रास्ते की ओर मुड़ गए। यहां रात करीब 10.30 बजे कार रोकी और कार के अंदर ही जीत का गला घोंटकर हत्या कर दी और उसके शव को बोरे में भर दिया। राहुल पाल ने अपने घर के पीछे झाड़ियों के बीच एक बोरे में शव को ठूंसकर रखा था।

जब आरोपियों को शक हुआ कि शव से दुर्गंध आएगी, तो बुधवार की सुबह करीब 4 बजे आरोपियों ने शव को 100 मीटर दूर एक झाड़ी में ले जाकर फेंक दिया और पास ही एक मकान निर्माण के लिए लाई गई रेत में छिपा दिया। इस समय जीत अपने पैरों में जूतों के अलावा स्कूल यूनिफॉर्म में था। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद आरोपी राहुल पाल के घर के बगल वाली खाली इमारत की पहली मंजिल से जीत का स्कूल बैग बरामद किया। इस मामले में सुनवाई आज भी जारी है।

युग चांडक हत्याकांड 2014

आज भी नागपुर में कोई भी युग चांडक हत्याकांड को भुला नहीं पाया है। आठ साल का युग चांडक शहर के जाने-माने डॉक्टर मुकेश चांडक का मासूम बेटा था। 1 सितंबर, 2014 को स्कूल से लौटते समय, आरोपी राजेश और अरविंद ने उसे उसके घर के ठीक सामने से अगवा कर लिया। जब उसका बेटा घर नहीं लौटा, तो उसके पिता ने लकड़गंज पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पूरे शहर में एक बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। अगले दिन, 2 सितंबर को, नागपुर से 25 किलोमीटर दूर स्थित लोनखैरी गांव के पास एक सुनसान इलाके में, एक पुल के ड्रेनेज पाइप के अंदर फंसा हुआ युग का शव मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि युग की गला घोंटकर हत्या की गई थी। मामले में पुलिस की गहन जांच से पता चला कि मुख्य आरोपी कोई और नहीं, बल्कि राजेश दावरे था एक पूर्व अकाउंटेंट जिसने डॉ. चांडक के क्लिनिक में काम किया था।

युग चांडक हत्याकांड (सौजन्य-सोशल मीडिया)
युग चांडक हत्याकांड (सौजन्य-सोशल मीडिया)

डॉ. चांडक ने डावरे को गबन के आरोपों पर नौकरी से निकाल दिया था; दावरे ने अपने साथी, अरविंद सिंह के साथ मिलकर, इस नौकरी से निकाले जाने का बदला लेने की ठानी। युग की मौत के बाद, नागपुर में कई दिनों तक कैंडल मार्च निकाले गए। युग चांडक हत्याकांड में, नागपुर सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई।

कुश कटारिया हत्याकांड 2011

नागपुर में ऐसा ही एक और मामला सामने आया, जब वर्धमान नगर के रहने वाले और 'सुरुचि मसाला कंपनी' के मालिक प्रशांत कटारिया के 5 साल के बेटे कुश कटारिया का अपहरण कर लिया गया। आरोपी ने पैसों के लिए 11 अक्टूबर, 2011 को कुश कटारिया का अपहरण किया था। अपनी गर्लफ्रेंड के खर्चों को पूरा करने के लिए उसे पैसों की जरूरत थी। आरोपी आयुष पुगलिया ने प्रशांत कटारिया से 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।

कुश कटारिया हत्याकांड (सौजन्य-सोशल मीडिया)
कुश कटारिया हत्याकांड (सौजन्य-सोशल मीडिया)

हालांकि, जब उसे लगा कि स्थिति बिगड़ रही है, तो फिरौती की रकम मिलने से पहले ही उसने कुश के सिर को पत्थर से कुचलकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस मामले में, नागपुर हाई कोर्ट ने आरोपी आयुष पुगलिया को अपहरण और हत्या के आरोपों में तीन बार उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, जेल में आपसी रंजिश के चलते आरोपी की बाथरूम में हत्या कर दी गई।

नागपुर (Nagpur) एक ऐसा शहर है जो अपनी संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है, लेकिन कुश (2011) से लेकर अथर्व (2026) तक की लगातार घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक समाज के रूप में जनता की हार को दर्शाता है कि वे अपने बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण नहीं बना पा रहे हैं। इस तरह के मामले सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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