Gadchiroli: अट्टीवागू नाले पर अधूरी पुलिया को लेकर सिरोंचा में अनशन शुरू, 30 गांवों का संपर्क टूटने का खतरा
Hunger Strike: सिरोंचा में अधूरी पुलिया के कारण बारिश में 30 गांवों का रास्ता बंद होने का खतरा है। इसी के विरोध में लोगों ने तहसील ऑफिस के सामने भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - AI)
b: गडचिरोली जिले के सुदूर और आदिवासी बहुल सिरोंचा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की बदहाली को लेकर स्थानीय नागरिकों का धैर्य अब पूरी तरह टूट चुका है। सिरोंचा तहसील के टेकडाताल्ला-कंबालपेठा मुख्य मार्ग पर स्थित अट्टीवागू नाले पर पिछले डेढ़ साल से बंद पड़े अधूरी पुलिया के निर्माणकार्य को तत्काल पूर्ण करने की मांग को लेकर सोमवार 25 मई से नागरिकों ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, त्रस्त ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से सिरोंचा तहसील कार्यालय के ठीक सामने बैठकर अनिश्चितकालीन श्रृंखलाबद्ध अनशन (भूख हड़ताल) शुरू कर दिया है। इस आंदोलन के कारण क्षेत्र के प्रशासनिक महकमे में भारी खलबली मच गई है।
डेढ़ साल से बंद काम
टेकडाताल्ला-कंबालपेठा मार्ग क्षेत्र के आवागमन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। इस मार्ग पर स्थित अट्टीवागू नाले पर एक पक्की पुलिया बनाने के लिए सरकार द्वारा आवश्यक प्रशासकीय और वित्तीय मंजूरी दी गई थी। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभाग द्वारा ठेकेदार को काम का टेंडर सौंपा गया और काम शुरू भी किया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद ठेकेदार ने तकनीकी और अज्ञात कारणों का हवाला देकर पुलिया का निर्माण कार्य बीच में ही पूरी तरह बंद कर दिया। पिछले डेढ़ वर्ष से यह महत्वपूर्ण पुलिया आधी-अधूरी स्थिति में लावारिस पड़ी हुई है, जिससे ठेकेदार और संबंधित लोक निर्माण विभाग की भारी लापरवाही उजागर होती है।
30 गांवों पर संपर्क का संकट
आंदोलनकारियों ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आगामी कुछ ही दिनों में जून महीने से भारी बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। पुलिया का निर्माण कार्य अधूरा छूटे होने के कारण बाढ़ की स्थिति में अट्टीवागू नाला पूरी तरह उफान पर आ जाता है। इसके चलते इस पूरे परिसर के लगभग 30 से अधिक दुर्गम गांवों का तहसील मुख्यालय और मुख्य शहरों से संपर्क पूरी तरह टूट जाने की प्रबल आशंका बनी हुई है। यदि बारिश से पहले इस पुल का काम शुरू नहीं हुआ, तो आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक खाद्यान्न की आपूर्ति के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करना पड़ेगा।
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उपेक्षा के बाद अनशन का फैसला
अनशन पर बैठे नागरिकों का सीधा आरोप है कि इस बेहद संवेदनशील जन समस्या को लेकर उन्होंने पिछले एक साल में कई बार स्थानीय प्रशासन, तहसीलदार और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित ज्ञापन सौंपे थे। इसके अलावा स्थानीय समाचार पत्रों में भी इस दुर्दशा को लेकर कई बार खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुईं, लेकिन इसके बावजूद कुंभकर्णी नींद में सोए प्रशासन ने अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की।
इसी प्रशासनिक उदासीनता के विरोध में आखिरकार सोमवार से तहसील कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन श्रृंखलाबद्ध अनशन का बिगुल फूंक दिया गया है। इस लोकतांत्रिक आंदोलन में केवल बड़े-बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जागरूक युवा और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी भी शामिल हुए हैं। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन अधूरे पुल का निर्माण कार्य धरातल पर तत्काल शुरू करने का लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक यह अनशन लगातार जारी रहेगा।
