हिंगना में 100 करोड़ का खेला, रजिस्ट्री ऑफिस के IT सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा
Nagpur News: 30 लाख से अधिक की संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की जानकारी आयकर विभाग को देना अनिवार्य है। हर रजिस्ट्रार ऑफिस को यह देना पड़ता है। आयकर विभाग ऐसे मामलों में नजदीक से नजर रखता है।
- Written By: प्रिया जैस
फ्रॉड (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur News: हिंगना के रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली पर आयकर विभाग के इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (आईएंडसीआई) विंग को शक हुआ और पिछले सप्ताह उक्त कार्यालय का सर्वे किया। सर्वे के दौरान आश्चर्यजनक खुलासे हुए हैं। जानकारी के अनुसार लगभग 1,300 करोड़ रुपये की संपत्ति का ब्योरा रजिस्ट्री विभाग ने छिपाकर रखा और उसकी जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी है, जबकि यह जानकारी देना अनिवार्य था।
नियम के अनुसार 30 लाख से अधिक की संपत्ति का पूर्ण ब्योरा विभाग को देना होता है। हिंगना कार्यालय ने तो 30 लाख तो दूर 100 करोड़, 30 करोड़ के सौदे को भी छुपा लिया। इसके बाद विभाग ने जांच और तेज कर दी है। विभाग की नजर अब शहर के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में टिक गई है और कभी भी इन कार्यालयों की छानबीन हो सकती है। इन मामलों में दलाल और चार्टर्ड एकाउंटेंटों की भूमिका को संदेश की नजर से देखा जा रहा है क्योंकि उनके इशारे पर ही यह कारनामा किया गया है।
इसका भंडाफोड़ तब हुआ जब कुछ लोगों ने करोड़ों की संपत्ति लेने का जिक्र अपने रिटर्न में दिखाया। कई रिटर्न में संपत्ति की खरीद-फरोख्त देखने के बाद विभाग के कान खड़े हो गए। जब विभाग द्वारा की गई जानकारी से मैच किया गया तो देखा गया कि विभाग की ओर से कोई जानकारी ही नहीं दी जा रही थी। इसके बाद सर्वे किया गया। आयकर सूत्रों की मानें तो यह मामला और बड़ा हो सकता है।
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जानबूझकर छिपाई जानकारी
प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि अधिकारियों ने जानबूझकर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह काम किया गया है। इस एक मामले के लगभग 2,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। आईएंडसीआई विभाग के अधिकारी निरंतर इस मामले में निगरानी रखे हुए हैं। पहले चरण में 700 करोड़ रुपये की संपत्ति की जानकारी छिपाने की सामने आई, फिर यह 1,300 करोड़ हो गया। इसके अभी और बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
500 से अधिक प्रॉपर्टी
सूत्रों की मानें तो कम से कम 500 प्रॉपर्टी की जानकारी छिपाई गई है। यह क्यों किया गया? यह समझने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं कइयों ने अपने रिटर्न में इसकी जानकारी दी है। इतने बड़े पैमाने पर घालमेल होने से कालाधन के इस्तेमाल की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। नकदी में भुगतान होने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है।
आरआर रेट से कम में रजिस्ट्रेशन
आईएंडसीआई के यह भी पाया है कि कई लोगों ने रेडी रेकनर दर से कम पर रजिस्ट्रेशन कराया है। कुछ संपत्तियों की कीमत अधिक होने के बाद भी आरआर रेट को हाशिए में डाल दिया गया। वहीं कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें प्रॉपर्टी टैक्स बचाने के लिए रेडी रेकनर दर को कम कर दिया गया। ऐसे मामलों में चार्टर्ड एकाउंटेंट की भूमिका की भी छानबीन होने लगी है।
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100 करोड़ के सौदे में भी खेल
हिंगना के इस रजिस्ट्री कार्यालय में एक ही सौदा 100 करोड़ रुपये का किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि इस सौदे की जानकारी तक नहीं दी गई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतना बड़ा एक ही सौदा किसने किया है? आखिर इतनी कीमती जमीन बेची किसने और खरीदी किसने? यह कौतूहल का वियष बन गया है। कई सौदे 20 से 30 करोड़ के बीच के भी हुए हैं। इससे पता चलता है कि शहर के कुछ इलाकों में बड़े सौदे हो रहे हैं।
सिटी में पहले हो चुका है सर्वे
नागपुर ग्रामीण में 12 और शहर में 9 रजिस्ट्री ऑफिस हैं। इस सर्वे के बाद सभी के सभी कार्यालय टारगेट में आ गए हैं। हालांकि सूत्रों की मानें तो इससे पहले सिटी के एक कार्यालय में भी सर्वे किया गया था जिनमें भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं।
