नागपुर सिटी में टीबी के 10,689 संदिग्ध मरीज मिले, IGGMC के ‘प्रोजेक्ट निदान’ में सामने आए आंकड़े
नागपुर में इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा चलाए गए प्रोजेक्ट निदान में 10689 संदिग्ध टीबी मरीजों की पहचान की गई है।
Nagpur TB Control IGGMC News: नागपुर शहर में टीबी नियंत्रण के लिए Indira Gandhi Government Medical College and Hospital द्वारा शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट निदान’ के पहले चरण में बड़ी संख्या में संदिग्ध मरीज सामने आए हैं।
23 जुलाई से 31 दिसंबर तक चले अभियान के दौरान कुल 25,282 मरीजों की जांच की गई, जिनमें 10,689 संदिग्ध मरीज पाए गए। इनमें से 3,372 मरीजों में टीबी के लक्षण मिले, जबकि 2,568 मरीज गंभीर स्थिति में पाए गए। इसके अलावा 60 मरीज पहले से टीबी से पीड़ित थे और 2,479 मरीज अन्य बीमारियों के साथ टीबी से प्रभावित पाए गए।
घर-घर सर्वे और शिविरों के जरिए जांच
शहर में Tuberculosis की पहचान और नियंत्रण के लिए ‘निदान टीबी’ अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, महानगरपालिका और National TB Elimination Programme का सहयोग लिया जा रहा है।
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पहले चरण में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर सर्वे, स्वास्थ्य शिविर और सामुदायिक जांच अभियान चलाए गए। सर्वे के दौरान यह भी सामने आया कि टीबी से प्रभावित लोगों में धूम्रपान करने वाले, शराब का सेवन करने वाले और 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति अधिक संख्या में शामिल हैं।
एआई आधारित एक्स-रे वैन का इस्तेमाल
अभियान के तहत बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में एआई आधारित मोबाइल चेस्ट एक्स-रे वैन का उपयोग किया गया। इससे मौके पर ही लोगों की एक्स-रे जांच कर संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई।
आधुनिक जांच पद्धति से पुष्टि
Dr. Ravi Chavan ने बताया कि संदिग्ध मरीजों की पुष्टि के लिए मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग किया गया, जिससे टीबी और ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी की पहचान जल्दी हो सकी।
उन्होंने बताया कि चिन्हित मरीजों को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मुफ्त दवाइयां और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही Nikshay Poshan Yojana के तहत मरीजों को हर महीने पोषण सहायता भी दी जाती है, ताकि इलाज के दौरान उनकी सेहत बेहतर बनी रहे।
जल्द शुरू होगा दूसरा चरण
डॉ. चव्हाण के अनुसार कई बार टीबी के मामले शुरुआती चरण में सामने नहीं आते। ऐसे सक्रिय केस खोज अभियान से बीमारी की जल्दी पहचान संभव होती है और संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और सक्रिय स्क्रीनिंग के माध्यम से शहर को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण साबित होगा और जल्द ही इसका दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा।
