नागपुर मनपा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
NMC Road Tender Dispute: नागपुर महानगरपालिका में सत्ता स्थापित हुए अभी 2 माह भी नहीं हुए कि विभिन्न विकास कार्यों के लिए ठेकेदारों की नियुक्ति को लेकर तकरार शुरू हो गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिटी की सड़कों के गड्ढों को बुझाने के लिए प्रस्तावित टेंडर को लेकर अब स्थायी समिति के सदस्यों ने ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। यहां तक कि प्रस्ताव ही रद्द करने को लेकर घमासान मचा हुआ है।
विपक्ष के नेता संजय महाकालकर ने कहा कि महानगरपालिका (मनपा) की आगामी स्थायी समिति की बैठक से पहले सड़कों की मरम्मत के लिए निजी ठेकेदार को दिए जाने वाले करोड़ों के काम पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के स्थायी समिति सदस्यों ने हॉट मिक्स प्लांट विभाग द्वारा ‘जेट पैचर’ मशीन के जरिए गड्ढे भरने के लिए प्रस्तावित 1.43 करोड़ के टेंडर पर तीखा ऐतराज जताया है और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।
– स्थायी समिति में कांग्रेस सदस्य अभिजीत झा, वसीम खान, मारिस्टेला उसरे और अभिषेक शंभरकर ने स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दाणी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस प्रस्ताव पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
– कांग्रेस का आरोप है कि जिस ‘मेसर्स अंजनीकृपा लॉजिस्टिक्स’ कंपनी को यह ठेका दिया जा रहा है उसके संचालक नरेंद्र जिचकार की पत्नी डॉ। शिल्पा जिचकार पिछले 16 वर्षों से नागपुर मनपा के स्वास्थ्य विभाग में सेवारत हैं।
– ज्ञापन के अनुसार, महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 59 स्पष्ट रूप से ऐसे मामलों में हितों के टकराव के आधार पर संस्था को ठेके के लिए अपात्र घोषित करती है। सदस्यों ने याद दिलाया कि वर्ष 2011 में भी स्थायी समिति ने इसी तरह के एक मामले में ठेका देने से इनकार कर दिया था।
कांग्रेस सदस्यों ने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार पिछले 14 वर्षों से लगातार मनपा के काम कर रहा है और अब तक 60 करोड़ से अधिक के ठेके हासिल कर चुका है। सदस्यों ने आशंका जताई है कि ठेकेदार और मनपा के कुछ अधिकारियों के बीच गहरी मिलीभगत है।
इसके अलावा यह भी जानकारी दी गई है कि उक्त ठेकेदार पर मनपा की जमीन पर अतिक्रमण करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज है। कांग्रेस का कहना है कि ऐसी विवादित और कानूनी उलझनों वाली संस्था को सार्वजनिक कार्य सौंपना बेहद गंभीर मामला है।
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विपक्ष का तर्क है कि जब मनपा के पास अपना खुद का अत्याधुनिक ‘हॉट मिक्स प्लांट’ उपलब्ध है तो बाहरी ठेकेदार को काम देना अनावश्यक है। साथ ही ‘जेट पैचर’ तकनीक से किए जाने वाले काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। नागरिकों की बार-बार शिकायतें रही हैं कि इस तकनीक से भरे गए गड्ढे बहुत जल्दी फिर से उखड़ जाते हैं।
– विषय क्रमांक 6 (गड्ढे मरम्मत का प्रस्ताव) को तुरंत रद्द किया जाए।
– वर्ष 2012 से इस ठेकेदार को दिए गए सभी कार्यों और भुगतानों की गहन जांच की जाए।
– दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कठोर कानूनी कार्रवाई कर सार्वजनिक निधि की वसूली की जाए।