मध्य रेलवे (सौ. नवभारत )
Women Staff In Indian Railways: अपने घर परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए पुरुषप्रधान समाज व कार्यस्थलों पर भी महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है।
प्रायः महिलाओं के लिर चुनौतीपूर्ण समझे जाने वाले रेल विभाग में ट्रैक दुरुस्ती से लेकर मेल एक्सप्रेस गुड्स व लोकल ट्रेनों को चलाने में महिलाएं अपना योगदान दे रहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मध्य रेल पर कार्यरत उन महिला कर्मचारियों का जिक्र जरूरी है,जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में बाधाओं को तोड़ते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इन महिलाओं ने अपने कार्य के प्रति समर्पण, धैर्य और प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
वैसे मध्य रेल में 8197 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं, जो विभिन्न चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। इनमें लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, ट्रेन मैनेजर, सिग्नल तकनीशियन, वेल्डर, टीटीई, आरपीएफ कर्मी, पॉइंट्समैन और टिकट जांच कर्मचारी शामिल हैं। अपने प्रेरणादायक सफर में कई महिलाओं ने उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। उनमें कुछ का उल्लेख यहां जरूरी है।
ममता कुलकर्णी जो मुलुंड स्टेशन मैनेजर के रूप में मुंबई मंडल में मध्य रेल की पहली महिला स्टेशन मैनेजर हैं। इनके साथ सारिका सावंत, स्टेशन मैनेजर, माटुंगा यह स्टेशन भारतीय रेलवे का पहला उपनगरीय स्टेशन है जिसे पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित किए जाने के कारण लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
महिलाओं द्वारा संचालित माटुंगा स्टेशन को पिंक स्टेशन कहा जाता है। यहां सभी महिलाएं ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान का समन्वय, सिग्नल और ट्रैक क्लियरेंस की निगरानी, लोको पायलट, गार्ड और कंट्रोल के साथ समन्वय, दुर्घटना या तकनीकी खराबी जैसी आपात स्थितियों का प्रबंधन, यात्रियों की शिकायतों का समाधान, स्वच्छता व सुविधाओं की निगरानी तथा व्यस्त समय में भीड़ प्रबंधन जैसे कार्य प्रभावी ढंग से करती हैं।
अनुपमा पाटील, लोको पायलट हैं,जो गुड्स ट्रेन चलाती हैं। वे मध्य रेल की महिला लोको पायलटों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करते हुए पुरुष प्रधान क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
प्रियंका मुदलियार,ट्रेन मैनेजर (गुड्स), पनवेल जो मध्य रेल की महिला ट्रेन मैनेजरों का प्रतिनिधित्व करती हैं। रेलवे परिवार की तीसरी पीढ़ी से जुड़ी होने के कारण वे इस परंपरा को आगे बढ़ाने पर गर्व महसूस करती हैं। वे मानती हैं कि रेलवे में लिंग के आधार पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर समान अवसर दिए जाते हैं।
रेलवे में कई महिलाएं टीटीई का कार्य सफलतापूर्वक कर रहीं हैं। सारिका ओझा, सुश्री वर्षा तायडे और सुश्री मनीषा राहुलराम, प्रतिष्ठित वंदे भारत एक्सप्रेस में टीटीई के रूप में कार्यरत हैं। सुजाता कलगांवकर और लता भगत, मध्य रेल की खिलाड़ी होने के साथ-साथ टिकट इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। ये सभी महिला बिना टिकट यात्रा को रोकने और यात्रियों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मध्य रेल में कई महिलाएं सीधे ट्रैक पर उतर कर पॉइंट्समैन का कार्य बखूबी कर रहीं हैं। गीता नागवेकर, पॉइंट्समैन, दादर और रुपाली खरे, पॉइंट्समैन, माटुंगा ये सभी महिला पॉइंट्समैन का कठिन फील्ड वर्क करते हुए मुंबई लोकल की सिग्नल व्यवस्था,आपात स्थितियों और अन्य चुनौतीपूर्ण कार्यों को कुशलता से संभालती हैं।
सुषमा होंडेवकर अपनी मधुर आवाज और विनम्र शैली में यात्रियों को ट्रेन संबंधी जानकारी और सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक निर्देश देती हैं।
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इसी तरह रेल सुरक्षा बल में कार्यरत सुश्री सोनम विश्वकर्मा, महिला आरपीएफ कांस्टेबल, ठाणे, सुश्री नाज़नीन कुरैशी जैसी लड़कियों ने उल्लेखनीय कार्य कर अपनी क्षमता का परिचय दिया है। अनुशासन, कड़ी मेहनत के साथ रेलवे के जोखिम भरे कठिन पेशे को अपनाने वाली महिलाओं का सम्मान समय समय पर मध्य रेल प्रशासन करता रहा है।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए सूर्यप्रकाश मिश्र की रिपोर्ट