महाराष्ट्र से 50 तेंदुए वनतारा भेजने की तैयारी, सरकार के फैसले पर वन्यजीव कार्यकर्ताओं का विरोध

Maharashtra Government राज्य से 50 तेंदुओं को जामनगर स्थित वनतारा वन्यजीव संरक्षण केंद्र भेजने की तैयारी कर रही है। सरकार इसे मानव-तेंदुआ संघर्ष कम करने का कदम बता रही है।
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तेंदुआ (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra Leopards Transfer Vantara Plan: कोल्हापुर (नंदिनी मठ) से 'महादेवी' (माधुरी) हथिनी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जामनगर स्थित रिलायंस फाउंडेशन के 'वनतारा' वन्यजीव संरक्षण केंद्र में भेजने खड़ा हुआ बवाल कुछ महीने पहले ही बमुश्किल 'महादेवी' की वापसी के साथ शांत हुआ।

अब राज्य सरकार ने महाराष्ट्र के पशुप्रेमियों को उकसाने वाला दूसरा बड़ा निर्णय ले लिया है। सरकार अब वनतारा को राज्य से 50 तेंदुए देने की तैयारी कर रही है। इस निर्णय के पीछे वन मंत्री गणेश नाईक का तर्क है कि राज्य में तेंदुओं की संख्या बढ़ गई है।

आवासीय इलाकों में तेंदुए आ रहे हैं। इससे मानव-तेंदुआ संघर्ष बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए तेंदुओं को वनतारा भेजने का फैसला किया है। विभिन्न रेस्क्यू ऑपरेशन में 67 तेंदुए पकड़े गए हैं, जिन्हें अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा, जिनमें से 50 को वनतारा भेजा जाएगा।

अधिकारियों का हालांकि कहना है कि निर्णय लेने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने वनतारा जामनगर का निरीक्षण किया और स्थिति अनुकूल मिलने पर अब अमल किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वन विभाग ने लगभग 20 तेंदुओं की पहचान की है, जिन्हें पहले चरण में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है।

वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने किया विरोध

नेटकनेक्ट फाउंडेशन के निदेशक बी एन कुमार ने कहा कि यह गलत है क्योंकि इसे अपने प्राकृतिक वन आवासों में फलने-फूलने की जरूरत है। उन्हें किसी छोटे चिड़ियाघर या वन्यजीव केंद्र में भेजना कोई अच्छा समाधान नहीं है।

बीड के वन्यजीव कार्यकर्ता नितिन अलकुटे ने कहा कि 3 महीने से अधिक समय से मैं अहिल्यानगर जिले में छोटे पिंजरों में रखे गए 21 तेंदुओं को रिहा कराने के लिए संघर्ष कर रहा हूं, एक तेंदुए की मौत हो गई है।

नवंबर में ही भेज दिए गए होते

पुणे जिले के जुन्नार क्षेत्र में मानव तेंदुआ संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर नवंबर 2025 में तेंदुओं को वनतारा स्थानांतरित किया गया था। उसी दौरान नंदिनी मठ की महादेवी को वनतारा भेजने को लेकर बवाल खड़ा हो गया। दर्जनों गांवों के ग्रामीण विरोध पर उतर आए, रिलायंस के जियो सिम कार्ड का बहिष्कार तक शुरू हो गया। इस विरोध को देखते हुए तब तेंदुओं को भेजने का निर्णय ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

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