विरार-अलीबाग कॉरिडोर की बड़ी बाधा दूर, वन विभाग को मिलेगी 30 हेक्टेयर जमीन, सफर का समय 5 से घटकर होगा 2 घंटे
Maharashtra MSRDC News: महायुति सरकार ने विरार-अलीबाग मल्टी मॉडल कॉरिडोर के लिए पालघर की 30 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को सौंपने की मंजूरी दी है। इससे वन विभाग से मंजूरी का रास्ता साफ हो गया है।
- Written By: रूपम सिंह
सांकेतिक फोटो, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Maharashtra MSRDC Virar Alibaug Corridor: महायुति सरकार ने विरार-अलीबाग मल्टी मॉडल कॉरिडोर परियोजना की सबसे बड़ी प्रशासनिक बाधाओं में से एक को दूर करते हुए पालघर के डहाणू स्थित 30 हेक्टेयर सरकारी जमीन वन विभाग को हस्तांतरित करने का फैसला किया है। इस निर्णय से परियोजना के लिए आवश्यक वन मंजूरी का रास्ता साफ होगा और करीब 80 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में मुंबई महानगर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को भी बड़ा लाभमिलेगा।
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल द्वारा निर्माणाधीन विरार से अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर परियोजना को अब बड़ी गति मिलने की संभावना है। परियोजना के मार्ग में आने वाली वन भूमि संबंधी बाधा दूर करने के लिए पालघर जिले के डहाणू तहसील के चंडीगांव स्थित 30 हेक्टेयर सरकारी भूमि वन विभाग को हस्तांतरित करने को राजस्व विभाग ने मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल से मंत्रालय स्तर पर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने इस परियोजना को अत्यावश्यक सार्वजनिक परियोजना का दर्जा भी दिया है।
1 रूपय प्रति वर्गमीटर की नाममात्र दर पर भूमि उपलब्ध
इस परियोजना के तहत पालघर जिले के नवघर से रायगढ़ जिले के उरण स्थित चिरनेर तक लगभग 80 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग आवश्यक होने के कारण वन विभाग से मंजूरी प्राप्त करने के लिए उसके बदले वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना जरूरी था। इसी के तहत चंडीगांव स्थित गट क्रमांक 729 की कुल 252.95 हेक्टेयर सरकारी भूमि में से 30 हेक्टेयर क्षेत्र वन विभाग को प्रतिपूरक वनीकरण के लिए उपलब्ध कराया गया है।
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यह भूमि एमएसआरडीसी को निवेशकर्ता वर्ग-2 के रूप में मात्र एक रुपए प्रति वर्गमीटर की नाममात्र दर पर दी जाएगी। कोकण विभागीय आयुक्त और पालघर के जिलाधिकारी की ओर से इस साल की शुरुआत में प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर यह मंजूरी दी गई है। इससे परियोजना की वन स्वीकृति में सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है और निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
भूमि हस्तांतरण के साथ कई शर्तें भी लागू
महायुति सरकार ने भूमि हस्तांतरण के साथ कई शर्तें भी लागू की है। एमएसआरडीसी को 3 महीने के भीतर यह 30 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को सौंपनी होगी। भूमि का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा।
यदि परियोजना बंद होती है, तो भूमि बिना किसी मुआवजे के सरकार को वापस करनी होगी। सरकार की अनुमति के बिना भूमि का हस्तांतरण, गिरवी रखना या अन्य किसी उद्देश्य से उपयोग नहीं किया जा सकेगा। भविष्य में भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को हटाने की जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।
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परियोजना से MMR में ट्रैफिक का दबाव होगा कम
पालघर और रायगढ़ जिलों को सीधे जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से मुंबई महानगर क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी कम होगा। साथ ही दोनों जिलों के बीच यात्रा का समय घटेगा और परिवहन व संपर्क व्यवस्था को नई गति मिलेगी। इस कॉरिडोर के बन जाने से विरार से अलीबाग तक का सफर केवल डेढ़ से दो घंटे में पूरा करना संभव हो जाएगा। मौजूदा समय में विरार से अलीबाग पहुंचने में 4 से 5 घंटे का समय लगता है।
