ठाणे बेलापुर इंडस्ट्रियल बेल्ट क्राइसिस (सौ. सोशल मीडिया )
Thane Belapur Industrial Belt Crisis: खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात का असर नवी मुंबई के इंडस्ट्रियल सेक्टर पर पड़ने लगा है और ठाणे-बेलापुर इंडस्ट्रियल बेल्ट की कई इंडस्ट्रीज दबाव में आ गए हैं। इंडस्ट्री एसोसिएशन आने वाले हफ़्ते में इस बेल्ट की करीब आधी फैट्रियों के कुछ समय के लिए बंद होने की आशंका जता रहे हैं।
क्योंकि इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट प्रोसेस में रुकावटें, कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई चेन में रुकावट आ रही है। आशंका है कि इस स्थिति का सीधा असर करीब 10 लाख वर्कर्स की नौकरी पर पड़ेगा।
नवी मुंबई में ठाणे-बेलापुर इंडस्ट्रियल बेल्ट देश के अहम इंडस्ट्रियल जोन में से एक माना जाता है। इस बेल्ट में करीब चार से साढ़े चार हजार इंडस्ट्रीज चल रही हैं, जिनमें केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कई तरह के छोटे और मीडियम एंटरप्राइजेज शामिल हैं। इनमें से कई इंडस्ट्रीज़ कच्चे माल के लिए विदेशी सप्लाई पर निर्भर हैं। खाड़ी में मौजूदा लड़ाई ने समुद्री रास्तों पर अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे शिपिंग और इंटरनेशनल ट्रेड पर असर पड़ा है।
कच्चे माल की सप्लाई में देरी हो रही है और इसकी कीमतें भी काफी बढ़ गई है। एक्सपोर्ट प्रोसेस पर भी असर पड़ रहा है, तैयार माल के एक्सपोर्ट में देरी के कारण कई इंडस्ट्रीज को प्रोडक्शन कम करना पड़ रहा है।
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स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के। आर। गोपी ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में बढ़ोतरी और इंपोर्ट प्रोसेस में देरी के कारण, खासकर छोटे और मीडियम इंडस्ट्रीज को बड़ी फाइनेंशियल चुनौती का सामना करना पड़ा है। स्थिति गंभीर होती जा रही है।