उद्धव की बैठक में गैरहाजिर एकनाथ शिंदे के मंत्री के पास हाजिरी, शिवसेना UBT सांसद को लेकर तेज हुई चर्चा
Sanjay Deshmukh Meets Prataprao Jadhav Delhi: उद्धव ठाकरे की बैठक से नदारद यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में शिंदे गुट के मंत्री से मुलाकात की, दलबदल की अटकलें तेज।
- Written By: अनिल सिंह
संजय देशमुख उद्धव ठाकरे (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Deshmukh Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर उस समय भूचाल आ गया, जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) की आपात बैठक से गायब रहने वाले यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख सीधे दिल्ली पहुंच गए। मुंबई में बुलाई गई ‘एकता बैठक’ में कुल 9 लोकसभा सांसदों में से महज 4 ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे, जबकि संजय देशमुख समेत 5 सांसद मातोश्री से नदारद रहे। इस अनुपस्थिति के ठीक एक दिन बाद, सोमवार को सांसद संजय देशमुख को नई दिल्ली में एकनाथ शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के साथ देखा गया, जिससे राज्य में महाविकास अघाड़ी खेमे के भीतर बड़ी टूट की अटकलों को जबरदस्त हवा मिल गई है।
इस बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है और बगावत की किसी भी कोशिश को नाकाम करने के लिए एक सख्त कदम उठाया है।
2 दिनों में मातोश्री पहुंचने का फरमान
विपक्षी गठबंधन और शिंदे गुट द्वारा चलाए जा रहे कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ के खौफ को खत्म करने के लिए उद्धव ठाकरे ने अनुपस्थित रहने वाले सभी पांचों सांसदों को दो दिनों का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर को निर्देश दिया है कि वे अगले दो दिनों के भीतर मातोश्री पहुंचकर उनके साथ आमने-सामने (व्यक्तिगत रूप से) जरूरी बैठक करें। हालांकि, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने दावा किया कि ये सभी नेता ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ठाकरे केवल अष्टिकर से ही सीधे संवाद कर पाए थे।
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केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव की सफाई
संजय देशमुख के साथ हुई इस सीक्रेट मीटिंग पर मचे देशव्यापी हंगामे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने खुद सामने आकर सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि संजय देशमुख और वे विदर्भ क्षेत्र से आते हैं और उस समय से पुराने मित्र हैं जब दोनों एक ही संगठन में क्रमशः यवतमाल और बुलढाणा के जिला प्रमुख हुआ करते थे। जाधव ने राजनीतिक कयासों को खारिज करते हुए कहा कि संजय देशमुख का यवतमाल जिले में एक शिक्षण संस्थान (कॉलेज) है और वे उसी के सिलसिले में कुछ तकनीकी जानकारी लेने दिल्ली आए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुलाकात का पार्टी बदलने या किसी भी राजनीतिक फूट से कोई लेना-देना नहीं है।
‘मुंबई न जा पाने वाले दिल्ली कैसे पहुंचे?’
इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि जो सांसद रविवार को इमरजेंसी का हवाला देकर मुंबई नहीं पहुंच पाए, वे अगले ही दिन दिल्ली में विरोधी गुट के मंत्री के साथ चाय पीते नजर आए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, शिवसेना यूबीटी के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं और दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी धड़े को कम से कम दो-तिहाई यानी 6 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि संख्या बल जुटाने और अलग गुट बनाने की रणनीतियों के बीच संजय राउत भी तुरंत दिल्ली रवाना हो चुके हैं और विरोधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन वोल्फ’ शुरू करने की हुंकार भर रहे हैं।
