क्या DD ही दादा थे? सुनेत्रा पवार पर 32 करोड़ के टैक्स केस का अंत, जानें क्या है पूरा मामला?

Sunetra Pawar Clean Chit: ITAT ने सुनेत्रा पवार और अजित पवार के खिलाफ ₹32.14 करोड़ की अघोषित आय के मामले को सबूतों के अभाव में रद्द कर दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Was 'DD' the real 'Dada'? The Conclusion of the ₹32 Crore Tax Case Against Sunetra Pawar Find Out What the Entire Matter Is.
ITAT की जांच से सुनेत्रा पवार को राहत (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Sunetra Pawar ITAT Relief: महाराष्ट्र की राजनीति में पवार बनाम एजेंसियां की कानूनी लड़ाई में एक नया और बड़ा मोड़ आया है। आयकर अपील न्यायाधिकरण (ITAT) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की नेता सुनेत्रा पवार को बड़ी राहत देते हुए ₹32.14 करोड़ की कथित अघोषित आय का मामला पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि आयकर विभाग के आरोप केवल अनुमानों पर आधारित थे।

क्या थी DD डायरी की मिस्ट्री?

मामले की जड़ें ट्राइटन ग्रुप के जितेन पुजारी के ठिकानों पर हुई छापेमारी से जुड़ी हैं। इस रेड में आयकर विभाग को एक डायरी मिली थी, जिसमें 'DD' नाम के व्यक्ति के साथ करोड़ों के लेन-देन का हिसाब था। विभाग ने अपनी थ्योरी में दावा किया कि DD का मतलब अजित पवार (दादा) है। इसी आधार पर आयकर अधिनियम की धारा 153C के तहत कार्रवाई शुरू की गई, जिसमें सुनेत्रा पवार को भी शामिल किया गया।

ITAT की कड़ी टिप्पणी: अंदाजे सबूत नहीं होते

न्यायाधिकरण ने सुनवाई के दौरान विभाग की दलीलों को कमजोर पाया। फैसले के मुख्य आधार रहे की  विभाग यह साबित करने वाला कोई भी दस्तावेज या गवाह पेश नहीं कर सका जो यह पुष्टि करे कि DD वास्तव में अजित पवार ही हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी तीसरे पक्ष की डायरी में लिखी प्रविष्टियों को तब तक किसी की आय नहीं माना जा सकता, जब तक कि उससे संबंधित कोई ठोस वित्तीय लेन-देन या संपत्ति का सबूत न मिले। चूंकि मुख्य आरोप ही आधारहीन पाए गए, इसलिए सुनेत्रा पवार के खिलाफ जारी किए गए सभी नोटिस और ₹32.14 करोड़ की टैक्स मांग को शून्य (Null and Void) घोषित कर दिया गया।

सियासी मायने

लोकसभा चुनावों के बाद और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस फैसले को अजित पवार गुट की एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष द्वारा लगातार 'एजेंसियों के दुरुपयोग' और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच, यह अदालती फैसला सरकार और पवार परिवार को बचाव का एक मजबूत हथियार देगा।

क्या है धारा 153C? (The Third Party Search Rule)

आमतौर पर जब किसी व्यक्ति पर छापा पड़ता है, तो कार्रवाई धारा 153A के तहत होती है। लेकिन धारा 153C तब लागू होती है जब:

  • छापा व्यक्ति A (जैसे टाइटन ग्रुप) के यहाँ पड़े।
  • लेकिन वहां से ऐसे दस्तावेज, गहने या डायरी मिले जो व्यक्ति B (जैसे अजित पवार) के हों या उनसे संबंधित हों।
  • ऐसे में विभाग B के खिलाफ भी जांच शुरू कर देता है।