Mumbai: शुक्ला कंपाउंड विवाद पर राजनीति तेज, गोपाल शेट्टी ने उठाई आवाज
Mumbai: दहिसर के शुक्ला कंपाउंड में बीएमसी कार्रवाई की आशंका से सैकड़ों परिवारों में डर का माहौल देखने के लिए मिल रहा है। वर्षों से बसे लोग घर टूटने की चिंता में है।
- Written By: अपूर्वा नायक
शुक्ला कंपाउंड (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: दहिसर के रावलपाड़ा स्थित शुक्ला कंपाउंड पर बीएमसी की संभावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी डर और बेचैनी का माहौल है। वर्षों से बसे सैकड़ों परिवारों पर अब उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
जिन घरों में लोगों ने अपना जीवन खपा दिया, अब वही मकान बीएमसी की कार्रवाई की जद में बताए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने यहां अपनी गाढ़ी कमाई से घर बनाए, बिजली-पानी के कनेक्शन भी नियमित हैं, फिर भी उन्हें नोटिस देकर हटाने की बात की जा रही है।
स्थानीय निवासियों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है। अगर ये घर टूट गए, तो हमारे सिर पर छत नहीं बचेगी,” एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि 20 साल से शुक्ला कंपाउंड में रह रहे परिवारों के इस पूरे मामले को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर मुंबई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने स्थानीय मनपा सहायक आयुक्त से मुलाकात की थी।
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बैठक में उन्होंने निवासियों की पीड़ा को प्रमुखता से रखते हुए कहा था कि बीएमसी का रवैया अमानवीय प्रतीत हो रहा है। अगर बीएमसी न्यायालय के आदेश पर कुत्तों के लिए आश्रय बनाने की बात कर रही है, तो मैं शुक्ला कंपाउंड के इंसानों के लिए घर की बात कर रहा हूँ।
तो इसमें गलत क्या है? क्या अब इंसान कानून और बीएमसी की नजर में कुत्तों से भी गए-गुजरे हो गए हैं?” उनके इस बयान ने स्थानीय जनता के बीच नई उम्मीद और चर्चा दोनों को जन्म दिया है। लोगों ने शेट्टी के इस मुद्दे को उठाने का स्वागत किया और बीएमसी से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है।
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बीएमसी की कार्रवाई पर सवाल
- बीएमसी का कहना है कि यह इलाका नियमन के बाहर है और यहां कई निर्माण अवैध रूप से किए गए हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों का दावा है कि उन्हें बार-बार विभिन्न सरकारी योजनाओं में गिना गया है, मतदाता सूची में उनके नाम हैं और मनपा ने नियमित टैक्स भी वसूला है। इन सबके बावजूद कार्रवाई की तलवार लटकने से लोग हताश है।
- नागरिक संगठनों ने भी कहा है कि यदि किसी तरह की कार्रवाई होती है तो पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, भाजपा की विधायक मनीषा चौधरी ने भी शुक्ला कंपाउंड के मामले को आगामी महाराष्ट्र के अधिवेशन में उठाने की बात कही। शुक्ला कंपाउंड के निवासी अब प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वे कहते हैं कि ये अवैध कब्जेदार नहीं, बल्कि मेहनतकश लोग है, जिन्होंने अपने जीवनभर की कमाई से यह छोटा-सा घर बनाया है। हम कोई सुविधा नहीं मांग रहे, बस छत मत छीनिए, एक स्थानीय महिला की यह लाचार अपील शायद शहर के नियोजन के साथ-साथ संवेदनाओं पर भी सवाल उठाती है।
– नवभारत लाइव के लिए मुंबई से रितेश तिवारी की रिपोर्ट
