श्रीकांत शिंदे ने गणेश नाईक को दी चुनौती (सौ. सोशल मीडिया )
Shrikant Shinde Vs Ganesh Naik: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और वन मंत्री गणेश नाईक के बीच टकराव बढ़ गया है। नाईक ने शिंदे की आलोचना की थी। इसके बाद शिंदे के पुत्र व शिवसेना (शिंदे गुट) सांसद श्रीकांत शिंदे ने नाईक पर पलटवार किया है।
उन्होंने खुली चुनौती दी है कि यदि नाईक में हिम्मत है, तो वे आने वाला लोकसभा का चुनाव मेरे सामने लड़कर दिखाएं। सांसद श्रीकांत शिंदे ने जवाबी हमला बोला है कि शायद नाईक अपनी याददाश्त खो चुके हैं।
उनके घर में दो बच्चे और वह खुद हैं। उन्हें इस तरह की भाषा नहीं बोलनी चाहिए। इसे अंग्रेजी में डिमेंशिया कहते हैं। यदि वे ज्यादा भ्रमित हो गए हैं तो उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में खड़ा होना चाहिए, वे कल्याण या ठाणे किसी भी लोकसभा सीट को चुन सकते हैं। मेरे खुली चनौती है कि वे जहां से चुनाव लड़ना चाहें, वहां से लड़ सकते हैं। मैं उनके खिलाफ चुनाव लडूंगा।
दरअसल भाजपा नेता व मंत्री नाईक ने अप्रत्यक्ष रूप से डीसीएम शिंदे को घेरते हुए आरोप लगाया था कि हमारी ही सरकार के नगर विकास विभाग ने नवी मुंबई में बिल्डरों को प्लॉट दिए हैं। अस्पताल, गार्डन और स्कूल के लिए जमीन नहीं दी गई। जिस कैबिनेट का मैं सदस्य हूं, उसी नगर विकास विभाग के लोगों ने ऐसा जुल्म किया है। मैंने चुप रहने के लिए मंत्री का पद नहीं लिया है। उन्होंने मांग की है कि नवी मुंबईकरों के प्लॉट वापस किए जाएं।
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सांसद नरेश म्हस्के ने भी गणेश नाईक पर निशाना साधा है, म्हस्के ने नाईक पर अपने दोनों बेटों का करियर बर्बाद करने का आरोप लगाया है। म्हस्के ने कहा कि गणेश नाईक की लोकप्रियता का दीपक बुझ रहा है, वे बुझते हुए दीपक की तरह टिमटिमा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि गणेश नाईक श्रीकांत शिंदे को हराने की बात कर रहे है, शायद वे भूल गए है कि श्रीकांत शिंदे कभी चुनाव नहीं हारे हैं।
वे रिकॉर्ड संख्या में वोटों से चुने गए हैं। हालांकि एकनाथ शिंदे की रणनीति के चलते उनके दोनों बच्चे सांसद या विधायक के साथ-साथ अपने नाम के आगे ‘पूर्व’ शब्द जोड़ रहे हैं। म्हस्के ने गणेश नाईक की आलोचना करते हुए कहा कि गणेश नाईक एक ऐसे पिता हैं जो अपने बच्चों का करियर बर्बाद कर रहे हैं।
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म्हस्के ने यह भी कहा कि नाईक को यह जानकर बहुत बुरा लग रहा होगा कि दिल्ली में उपमुख्यमंत्री शिंदे की बात मानी जाती है। हम गणेश नाईक की उम्र का सम्मान करते हैं। लेकिन अगर वे इस तरह से आलोचना करते हैं, तो हम भी उसी तरह जवाब देंगे। उन्होंने अपने बेटे को राष्ट्रवादी पार्टी से चुनाव लड़ाया, क्योंकि उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। उन्होंने मंदा म्हात्रे को हराने की कोशिश की और वे हमें पार्टी के प्रति वफादारी सिखाएंगे।