शिवसेना की स्थापना दिवस पर उद्धव को लगेगा सबसे बड़ा झटका, UBT सांसद और संजय राउत की पोस्ट से मिला हिंट
Shiv Sena UBT Split Rumours Foundation Day: 19 जून को शिवसेना स्थापना दिवस से पहले उद्धव गुट में बड़ी टूट की आशंका; संजय राउत और राजाभाऊ वाजे के बयानों से अटकलें तेज।
- Written By: अनिल सिंह
19 जून से पहले उद्धव गुट के 5 सांसदों की दूरी ने बढ़ाई महाराष्ट्र की सियासी तपिश (फोटो क्रेडिट-X)
Shiv Sena Foundation Day Operation Tiger: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ठीक वैसा ही माहौल, वैसी ही सुगबुगाहट और वैसी ही अंदरूनी बेचैनी तैरने लगी है, जिसने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार को तख्तापलट कर उखाड़ फेंका था। इस बार चर्चा के केंद्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लोकसभा सांसद हैं। राजनीतिक गलियारों में यह कयासबाजी बेहद तेज हो गई है कि 19 जून को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के ऐतिहासिक मौके पर उद्धव ठाकरे को अब तक का सबसे बड़ा झटका लग सकता है।
दावा किया जा रहा है कि दिल्ली का भाजपा शीर्ष नेतृत्व सीधे उद्धव गुट के सांसदों के संपर्क में है और महिला आरक्षण व परिसीमन जैसे आगामी बड़े संवैधानिक फैसलों के लिए एनडीए इन सांसदों को अपने पाले में लाने या बाहर से समर्थन जुटाने की जोरदार तैयारी में जुटा है।
हास्य जत्रा:
हे महाशय आहेत शिऊ कुंडू
नेशनलिस्ट सिटिज़न पार्टी चे संस्थापक अध्यक्ष,(त्रिपुरा)
यांच्याच “पार्टी “त तृणमूलच्या २२ खासदारांनी स्वतःला विलीन करून घेतले!
महाराष्ट्रातील फुटीरांना देखील अशाच एका कुंडू चा शोध घ्यावा लागेल!
घटनेतील १० वे अनुच्छेद तेच सांगतेय!
जय हो ! pic.twitter.com/IntLHHpsOK — Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 15, 2026
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संजय राउत की रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट
कैमरे के सामने लगातार “ऑल इज़ वेल” का दावा करने वाले शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने खुद अनजाने में इस डर को हवा दे दी है। सोमवार रात उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद चौंकाने वाली पोस्ट लिखी। उन्होंने त्रिपुरा की एक छोटी सी पार्टी के नेता शिव कुंडू का जिक्र करते हुए लिखा कि टीएमसी के 22 बागी सांसदों ने दलबदल कानून से बचने के लिए उनकी पार्टी में आधिकारिक विलय कर लिया।
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गुप्त खिचड़ी पक रही
राउत ने आगे लिखा कि महाराष्ट्र के दल-बदलुओं को भी खुद को बचाने के लिए किसी “कुंडू” को ढूंढना पड़ेगा। इस पोस्ट से साफ हिंट मिला कि उद्धव गुट के बागी सांसदों को अयोग्यता से बचाने के लिए टीएमसी वाली पटकथा पर ही किसी छोटी पार्टी में विलय की गुप्त खिचड़ी पक रही है। इसके साथ ही एनडीटीवी से खास बातचीत में जब राउत से पूछा गया कि सांसदों ने वफादारी की कसमें खाई हैं, तो उन्होंने तंजिया लहजे में कहा, “लोग कसम तो खाते रहते हैं, कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी।”
राजाभाऊ वाजे के ताजा बयान से बढ़ी हलचल
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मातोश्री में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई आपात बैठक में 9 में से केवल 4 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटिल और राजाभाऊ वाजे) ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे। गायब रहने वाले 5 सांसदों (संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबाळकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल आष्टीकर) के बारे में दावा किया गया कि वे ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन सूत्रों के अनुसार उद्धव केवल आष्टीकर से ही बात कर पाए थे। ये वही पांच सांसद हैं जो इसके ठीक एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी नदारद रहे थे। इस आग में घी डालने का काम नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे के ताजा बयान ने किया, जिन्होंने साफ कह दिया कि 19 जून को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम में वे शामिल हो पाएंगे या नहीं, यह अभी तय नहीं है क्योंकि वे दिल्ली से लौट रहे हैं और उनके क्षेत्र में भी कार्यक्रम हैं।
संजय देशमुख के बदले तेवर और मंत्री आशीष जायसवाल का ‘नो कमेंट’ रुख
मातोश्री की बैठक से गायब रहने के ठीक दूसरे दिन यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख सीधे दिल्ली में शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलने पहुंच गए। हालांकि अनिल देसाई ने डैमेज कंट्रोल करते हुए सफाई दी कि संजय देशमुख के घर बेटी को देखने के लिए मेहमान आने वाले थे और यह मुलाकात केवल एक शिक्षण संस्थान के निजी काम के सिलसिले में थी। दूसरी तरफ, नागपुर से महायुति के विधायक और शिंदे गुट के मंत्री आशीष जायसवाल ने “ऑपरेशन टाइगर” पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह पूरी तरह से यूबीटी का अंदरूनी मामला है और अगर उनके लोग नाराज होकर जा रहे हैं तो इसमें वे कुछ नहीं कर रहे, क्योंकि वैसे भी बगावत पहले से बताकर नहीं की जाती। बहरहाल, 19 जून के शक्ति प्रदर्शन से पहले कसमों और मुलाकातों के इस खेल ने उद्धव ठाकरे की चिंताएं चरम पर पहुंचा दी हैं।
