यह कब हुआ? विपक्ष के सवालों से घिरी सरकार, अमित शाह के दावों को ठहराया झूठा
Politics News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के महाराष्ट्र दौरे के दौरान उनके भाषण पर विपक्ष ने हमला बोला है। विपक्ष ने सरकार के दावों को झूठा करार दिया है, जिसका सरकार की ओर से जवाब नहीं आया है।
- Written By: प्रिया जैस
उद्धव ठाकरे और अमित शाह (सौजन्य-सोशल मीडिया)
मुंबई: शिवसेना यूबीटी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि मोदी सरकार झूठ बोलने वालों का विश्वविद्यालय है, जिसके कुलगुरु केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैं। मुंबई में शाह ने दावा किया था कि मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया में दसवें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंचा दिया है। लेकिन सवाल उठता है कि यह कब हुआ? इस पर भारत की 140 करोड़ जनता सोच रही है।
इसमें अडानी, अंबानी, अमीर राजनेता और उनके परिवार शामिल नहीं हैं, उनका भारत कुछ और ही है। शिवसेना यूबीटी ने कहा कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होना गर्व की बात है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए। लेकिन सिर्फ शाह के कहने से यह दावा स्वीकार्य नहीं है। यह ‘विश्व चौथा स्थान’ जनजीवन में नजर नहीं आता। शाह के भाषण के बीच हरियाणा से दुखद खबर आई, जहां आर्थिक तंगी से परेशान होकर एक परिवार के छह सदस्यों ने आत्महत्या कर ली।
सवालों से घिरी सरकार
देश में किसान, महिलाएं, परिवार और बेरोजगार जीवन बिताने में कठिनाई झेल रहे हैं। ऐसे में जो लोग भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बता रहे हैं, उन्हें इन समस्याओं की ओर भी ध्यान देना चाहिए। भारत के चौथे स्थान की अर्थव्यवस्था बनने के बाद भी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को बंद क्यों करना पड़ा? तेंदूपत्ते की खरीद क्यों बंद हो गई? रेलवे समेत सरकारी नौकरी की भर्ती क्यों रुकी? सरकारी उपक्रमों का निजीकरण क्यों बढ़ रहा है? आज भी आदिवासी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की प्रसूति सड़क पर क्यों हो रही है? नक्सलवाद क्यों बढ़ा है?
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शिवसेना यूबीटी ने कहा गरीबी रेखा के नीचे रह रही बहनों को प्रति माह 2,100 रुपये की मदद क्यों नहीं मिलती? हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा क्यों पूरा नहीं हो पाया? इन सब सवालों के जवाब मिलना जरूरी हैं। शिवसेना यूबीटी ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था का निजीकरण हुआ, जिसका लाभ आम जनता को नहीं, बल्कि उद्योगपतियों को मिला। मोदी सरकार ने उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ।
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भारत के लिए निराशाजनक आंकड़े
किसान अपनी फसलों को उचित कीमत दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यह भी सुनिश्चित नहीं कर पा रही। भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना जापान से करना गलत है, क्योंकि जापान एक छोटा देश है। तुलना चीन से करनी चाहिए। यदि चीन और भारत के प्रति व्यक्ति आय की तुलना की जाए तो भारत 143वें स्थान पर है। आईएमएफ के अनुसार अमेरिका का प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 75,89,804 रुपये है, जर्मनी का 47,61,920, चीन का 11,65,993, जापान का 28,92,413 और भारत का सिर्फ 2,45,293 रुपये। यह आंकड़े भारत के लिए निराशाजनक हैं।
