बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार का विरोध करने पर किसी को तड़ीपार नहीं कर सकती पुलिस, आदेश रद्द
Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सईद अहमद की तड़ीपारी का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल सरकार के फैसलों का विरोध करने और नारे लगाने पर किसी नागरिक को तड़ीपार नहीं किया जा सकता।
- Written By: रूपम सिंह
जस्टिस जामदार (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Bombay High Court Justice Madhav Jamdar: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई नागरिक केंद्र सरकार के कुछ फैसलों का विरोध कर रहा है और उसके खिलाफ नारे लगा रहा है, उसे किसी इलाके से तड़ीपार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। जस्टिस माधव जामदार ने मुंबई पुलिस द्वारा सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ एक्सटर्नमेंट ऑर्डर जारी करने पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस जामदार ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, ‘यह क्या है? सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है।
वे विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते। यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करते हैं तो आप केस दर्ज कर देंगे। विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। याचिकाकर्ता ने बस ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं। नागरिक ऐसे नारे क्यों नाहीं लगा सकते ? ऐसे नारों के लिए तड़ीपारी
तडीपार करने वाले पुलिसकर्मियों पर जुर्माना
एसडीपीआई के जनरल सेक्रेटरी सईद ने यूसीसी, ज्ञानवापी मस्जिद जैसे विवाद को लेकर आंदोलन शुरू किया था। याचिका देखने के बाद जज ने पूछा कि तड़ीपारी का आधार क्या है। उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़े थे। जज ने कहा कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए तड़ीपार नहीं कर सकती क्योंकि वो सरकार का विरोध कर रहे हैं। जस्टिस जामदार ने मौखिक रूप से कहा, पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है। वे लोक सेवक हैं, मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाने जा रहा हूं।
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बच्चे मर रहे, नेता हॉर्स ट्रेडिंग में व्यस्त, वाशिंग मशीन का किया जिक्र
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल में चल रही हॉर्स ट्रेडिंग (सांसदों की खरीद-फरोख्त) पर भी टिप्पणी की, जिसमे सांसद और विधायक पार्टियां बदल रहे हैं। जज ने कहा कि एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और विधानसभा में किस बात पर चर्चा हो रही थी कि पीठासीन अधिकारी का चुनाव कैसे होता है और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे चले गए। यह क्या है? आपको (सईद) भी पाला बदल लेना चाहिए, वैसे भी पूरे महाराष्ट्र शहर में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके (सईद) खिलाफ कुछ एफआईआर हैं। पाला बदलने पर विचार करें, एक वॉशिंग मशीन है।
तड़ीपारी का आदेश भी कर दिया रद्द
जस्टिस जामदार ने तड़ीपारी आदेश को रद्द करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। आदेश में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के अनुसार, नागरिकों को अभिव्यक्ति के साथ-साथ सम्मान से जीने की भी आजादी है। भारत सरकार के कुछ फैसलों का विरोध करने के लिए तड़ीपारी जैसी कार्रवाई मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है। डीसीपी और कोंकण के डिवीजनल कमिश्नर के आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके तहत सईद को एक साल के लिए शहर से तड़ीपार किया गया था।
