शरद पवार का नया मास्टरस्ट्रोक! एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ करेंगे गठबंधन, महायुति में बड़ा फेरबदल
Sharad Pawar Alliance Eknath Shinde: शरद पवार की एनसीपी (SP) अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन कर महायुति सरकार का हिस्सा बनने जा रही है। वो सीधे महायुति में शामिल नहीं हो रहे हैं।
- Written By: अनिल सिंह
शरद पवार और एकनाथ शिंदे (फोटो क्रेडिट-X)
Sharad Pawar Eknath Shinde Alliance: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर सबसे बड़ा और अभूतपूर्व उलटफेर देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे देश के राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। राज्य में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) को अब तक का सबसे घातक झटका लगा है। शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) ने महाविकास अघाड़ी का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सीधा अलायंस (गठबंधन) करने का ऐतिहासिक फैसला ले लिया है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति गठबंधन के भीतर ही अब एक और नए उप-गठबंधन का जन्म होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) या भाजपा में अपनी पार्टी का विलय नहीं करेंगे, बल्कि वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना पूरा समर्थन देते हुए इस त्रिदलीय गठबंधन सरकार का हिस्सा बनेंगे।
जयंत पाटील को मिल सकता है वित्त मंत्रालय
इस नए सियासी समीकरण के बीच सूत्रों के हवाले से एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है कि शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील को महायुति सरकार में वित्त मंत्री का महत्वपूर्ण पद सौंपा जा सकता है। गौरतलब है कि यह हाई-प्रोफाइल पद पहले एनसीपी (अजित पवार) के पास हुआ करता था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बेहद करीब मानी जाती है। ऐसे में अब जब शरद पवार गुट सीधे एकनाथ शिंदे के साथ हाथ मिला रहा है, तो राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलने वाले हैं।
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इस बड़े फैसले की पटकथा पिछले कुछ दिनों में लिखी गई है। शरद पवार के बेहद भरोसेमंद नेता जयंत पाटील ने महज दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बेहद गोपनीय मुलाकात की थी। इसके तुरंत बाद, गुरुवार (16 जुलाई) को जयंत पाटील और जितेंद्र आह्वाड ने साझा तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। चूंकि जितेंद्र आह्वाड और एकनाथ शिंदे दोनों ही ठाणे जिले से आते हैं और वहां एक-दूसरे के धुर धुरंधर विरोधी माने जाते हैं, इसलिए इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और निर्णायक माना जा रहा था।
एनसीपी के दोनों गुटों का विलय नामुमकिन
शुरुआत में जब शरद पवार के एनडीए (NDA) के साथ आने की सुगबुगाहट शुरू हुई थी, तब गठबंधन की प्रमुख पार्टी भाजपा की ओर से यह ठोस प्रस्ताव रखा गया था कि शरद पवार और सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी का आपस में पूरी तरह से विलय (मर्जर) कर दिया जाए और दोनों गुट फिर से एक हो जाएं। हालांकि, यह फॉर्मूला दोनों ही धड़ों को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था।
सुनेत्रा पवार को पावर शेयरिंग मंजूर नहीं
एक तरफ सुनेत्रा पवार का गुट कतई नहीं चाहता था कि पार्टी के भीतर शक्ति और संगठन के अधिकारों का दोबारा बंटवारा हो। दूसरी तरफ, शरद पवार गुट का तर्क था कि शरद पवार जैसे देश के दिग्गज नेता और सुप्रिया सुले जैसी अत्यंत सीनियर सांसद सुनेत्रा पवार के मातहत रहकर काम कैसे कर सकते हैं? इन गंभीर मतभेदों के चलते दोनों गुटों का मर्जर पूरी तरह से खटाई में पड़ गया।
सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला तय
भाजपा नेतृत्व भी यह बिल्कुल नहीं चाहता कि इतने बड़े और कद्दावर नेताओं के महायुति में आने के बाद गठबंधन के भीतर किसी तरह की वैचारिक ‘खिचड़ी’ या आंतरिक कलह जैसी स्थिति पैदा हो। आगामी चुनावों में सीट शेयरिंग (सीटों के बंटवारे) को लेकर कोई बड़ा विवाद न खड़ा हो, इसके लिए शीर्ष स्तर पर एक नया और अनूठा फॉर्मूला (गठबंधन के अंदर गठबंधन) तैयार किया गया है। शरद पवार और एकनाथ शिंदे पिछले काफी समय से इस गुप्त फॉर्मूले पर आपसी बातचीत कर रहे थे।
एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे
दोनों नेताओं ने सर्वसम्मति से तय किया है कि भविष्य में होने वाले तमाम चुनावों में सीटों का तालमेल और बंटवारा सीधे तौर पर शिंदे गुट और शरद पवार गुट के बीच ही होगा। शरद गुट महायुति की किसी अन्य पार्टी में विलीन नहीं होगा। दोनों दल अपने-अपने पुराने राजनीतिक गढ़ों में अपने-अपने मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे और एनडीए के बैनर तले एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा, इस पूरे गठबंधन के बदले शरद पवार के सामने केंद्र सरकार की ओर से यह अनिवार्य शर्त भी रखी गई थी कि वे संसद में आने वाले आगामी लोकसभा परिसीमन बिल का पूरी ताकत से समर्थन करेंगे, जिस पर पवार राजी हो गए हैं।
