शरद-सुनेत्रा गुट के विलय की चर्चा तेज, फडणवीस से मुलाकात ने बढ़ाया सस्पेंस
Sharad Pawar devendra-fadnavis-meeting: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दोनों गुटों के नेताओं की अलग-अलग मुलाकातों के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि एनसीपी नेताओं ने किसी भी तरह की संभावना से इनकार किया है।
- Written By: वंदना शर्मा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एनसीपी के दोनों गुटों के नेताओं की अलग-अलग मुलाकातों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या शरद पवार गुट और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला गुट एक बार फिर साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। इन बैठकों के सामने आते ही राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात मानने के बजाय संभावित राजनीतिक बदलावों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। जबकि किसी भी पक्ष ने अभी तक विलय की पुष्टि नहीं की।
एनसीपी नेता सुनील तटकरे ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि अभी फिलहाल दोनों गुटों के विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस से उनकी मुलाकात केवल उनके लोकसभा क्षेत्र के विकास कार्यों, वित्तीय मामलों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर थी। तटकरे ने यह भी कहा कि इस मुलाकात का किसी राजनीतिक समझौते या विलय से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील भी की।
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राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की चल रही है कि जयंत पाटिल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे अलग-अलग समय पर मुख्यमंत्री से मिले। इसके बाद कई तरह के राजनीतिक समीकरण सामने आने लगे। जबकि सभी नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि उनकी मुलाकातें अलग-अलग कारणों से हुई और इनका आपस में कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद भी विपक्ष और राजनीतिक जानकार इन बैठकों को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चा सामने आ रही है। इससे पहले भी कई बार ऐसी खबरें सामने आई है। सुनील तटकरे ने स्वीकार किया कि साल की शुरुआत में विलय को लेकर कुछ स्तर पर चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन बाद में वह प्रक्रिया रुक गई। फिलहाल अभी किसी नए प्रस्ताव पर विचार नहीं हो रहा है और यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव आता है, तभी पार्टी अपना निर्णय लेगी।
हाल के दिनों में यह भी कहा जा रहा था कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले गुट में अंदरूनी मतभेद बढ़ रहे हैं। इन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील तटकरे ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने तो यह भी बोला कि सभी नेता आपसी सम्मान के साथ संगठन को मजबूत करने में लगे हैं लेकिन पार्टी के भीतर किसी तरह के अविश्वास की बात पूरी तरह निराधार है।
हालांकि तटकरे ने अपने बयान में यह स्पष्ट करते हुए बताया कि किसी विधेयक का समर्थन करने का अर्थ किसी गठबंधन में शामिल होना नहीं होता। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर अलग-अलग दल कई बार एक जैसी राय रखते हैं, लेकिन इसका मतलब राजनीतिक गठबंधन नहीं माना जा सकता। जबकि राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि यदि दोनों गुटों का विलय होता है तो भविष्य में एनडीए के साथ नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में फिलहाल अभी अटकलों का दौर जारी है। मुख्यमंत्री फडणवीस से लगातार हो रही मुलाकातों ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा दी है, लेकिन दोनों गुटों के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से किसी भी विलय की संभावना से इनकार किया है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार एनसीपी के दोनों गुट अपने-अपने संगठनात्मक ढांचे के साथ काम कर रहे हैं और विलय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
