Shaina NC on Iran Israel War (फोटो क्रेडिट-X)
Oil Price Impact Middle East Conflict: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत के व्यापारिक हितों पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस गंभीर स्थिति पर शिवसेना नेता शाइना एनसी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न केवल मानवीय संवेदनाएं व्यक्त कीं, बल्कि भारत के आर्थिक हितों और विदेशों में फंसे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया है।
शाइना एनसी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन (हालिया घटनाक्रम के संदर्भ में) पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार की प्राथमिकता इस वक्त वहां मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों और भारत के बासमती चावल निर्यात पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का जिक्र किया।
Mumbai, Maharashtra: On the killing of Iran’s Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in the US-Israel strike, Shiv Sena leader Shaina NC says, “First and foremost, condolences to Iran for the loss of Ayatollah Ali Khamenei. But I think what we need to first concentrate on is the… pic.twitter.com/2sUqmWGIVU — IANS (@ians_india) March 1, 2026
शाइना एनसी ने जोर देकर कहा कि भारत सरकार ने पहले ही इजरायल और ईरान दोनों देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है। उन्होंने कहा, “हमें सबसे पहले अपने नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। सरकार ने उन्हें सतर्क रहने और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है।” युद्ध की स्थिति में विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना हमेशा से भारत सरकार की प्राथमिकता रही है और इस बार भी दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए शाइना एनसी ने बताया कि इस संघर्ष का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ना तय है। ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है, और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई की चुनौती पेश कर सकती है।
ईरान-इजरायल जंग पर व्यापारिक घाटे का उल्लेख करते हुए शिवसेना नेता ने बासमती चावल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “ईरान भारतीय बासमती चावल का एक बहुत बड़ा बाजार रहा है। भारत के कुल बासमती चावल निर्यात का लगभग 25% हिस्सा अकेले ईरान को निर्यात किया जाता था।” युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण यदि यह निर्यात रुकता है, तो भारतीय किसानों और निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ट्रेड डिस्प्शन (व्यापारिक व्यवधान) के चलते भारतीय कृषि क्षेत्र पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।