सतारा जिप चुनाव: महायुती में ठनी, विधानसभा में शिंदे ने अपनी ही सरकार को घेरा; सीएम ने जांच का दिया आश्वासन
Eknath Shinde: सतारा जिला परिषद चुनाव को लेकर महायुती में विवाद गहराया जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पुलिस पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
Eknath Shinde (सोर्सः सोशल मीडिया)
Satara ZP Election Controversy: सतारा जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर महायुती में ही विवाद पैदा हो गया है। शिवसेना के प्रमुख नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सतारा जिला परिषद चुनाव में पुलिस की कार्रवाई “लोकतंत्र की हत्या” है। उस समय सदन में मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने जिला परिषद चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग किया। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि मामले की उचित जांच कराई जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विधान परिषद में भी उठा मुद्दा
उधर, राज्य विधान परिषद में भी सतारा जिला परिषद चुनाव को लेकर शिवसेना के सदस्य आक्रामक हो गए। विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोऱ्हे ने सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित किया जाए।
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शिवसेना के मंत्री शंभूराज देसाई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता मकरंद पाटिल और अन्य सदस्यों ने भी पुलिस अधीक्षक के निलंबन की मांग की। देसाई और पाटिल ने आरोप लगाया कि जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान स्थानीय पुलिस ने उनके साथ हाथापाई की।
पालकमंत्री के अपमान का आरोप
सतारा जिला परिषद के अध्यक्ष पद के लिए शुक्रवार को हुए चुनाव में बहुमत न होने के बावजूद भाजपा की प्रिया शिंदे एक वोट से अध्यक्ष निर्वाचित हो गईं। जबकि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन के पास बहुमत होने के बावजूद उनका उम्मीदवार हार गया। शिवसेना के मंत्री शंभूराज देसाई, जो सतारा के पालकमंत्री भी हैं, और राज्य मंत्री मकरंद पाटिल ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान स्थानीय पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
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मतदान से पहले उठा ले गई पुलिस!
नाराज उपमुख्यमंत्री शिंदे ने विधानसभा में कहा कि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को मतदान से वंचित करना लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने निर्वाचित सदस्यों के साथ पेशेवर अपराधियों जैसा व्यवहार किया और उन्हें जिला परिषद परिसर से हटा दिया।
शिंदे ने बताया कि मतदान से पहले कुछ निर्वाचित सदस्यों को पुराने मामलों में हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी से संपर्क किया। इसके बावजूद कुछ सदस्यों को मतदान से पहले हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा कि यह मामला पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते तक भी पहुंचाया गया था। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
विधान परिषद में भी नाराजगी
सोमवार को विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विशेष बैठक में शिवसेना सदस्य हेमंत पाटिल ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री शंभूराज देसाई, मकरंद पाटिल और विधान परिषद सदस्य शशिकांत शिंदे के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया।
उपसभापति नीलम गोऱ्हे ने कहा कि सरकार को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए सतारा के पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों को निलंबित करना चाहिए। इस मुद्दे पर शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भाजपा के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
