Mumbai Health Alert: मुंबई में ‘पिंक आई’ का आतंक, गर्मी और प्रदूषण से आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ा
Eye Infection Mumbai Pollution: मुंबई में गर्मी और प्रदूषण के कारण 'पिंक आई' (कंजंक्टिवाइटिस) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने कॉर्निया डैमेज की चेतावनी दी है। जानें लक्षण और बचाव के उपाय।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांकेतिक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pink Eye Outbreak Mumbai: चिलचिलाती गर्मी, धूल के गुबार और बढ़ते वायु प्रदूषण ने अब मुंबईकरों की आंखों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से मुंबई महानगर में कंजंक्टिवाइटिस, जिसे आम भाषा में ‘पिंक आई’ कहा जाता है, के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में आंखों में जलन, लालपन, सूजन और खुजली की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हर आयु वर्ग के लोग चपेट में
अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल की नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. नुसरत बुखारी के अनुसार, संक्रमण का प्रसार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में देखा जा रहा है। आंकड़ों की बात करें तो इलाज के लिए आने वाले हर 3 से 4 बच्चों में आंखों में सूखापन (Dry Eyes) और जलन की समस्या मिल रही है। वहीं, वयस्कों और बुजुर्गों में कंजंक्टिवाइटिस के स्पष्ट लक्षण देखे जा रहे हैं। विशेष रूप से स्कूली बच्चे और आईटी सेक्टर में लंबे समय तक स्क्रीन के सामने काम करने वाले लोग इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए हैं।
कॉर्निया के लिए बढ़ा खतरा
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह केवल एक सामान्य संक्रमण नहीं है। इसका गंभीर रूप ‘वायरल केराटो-कंजंक्टिवाइटिस’ (Viral Kerato-conjunctivitis) के रूप में सामने आ रहा है। इसमें आंखों के अगले हिस्से में सूजन इतनी बढ़ जाती है कि एक चिपचिपी परत बन जाती है, जो सीधे तौर पर कॉर्निया को प्रभावित कर सकती है। मुंबई के एक निजी कार्यालय में काम करने वाले 41 वर्षीय सुहास कदम का उदाहरण देते हुए डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण बिगड़ने के कारण उनके कॉर्निया तक प्रभाव पहुँच गया, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
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बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद धूल के कण और गर्मी आंखों की नमी को सोख लेते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का रास्ता साफ हो जाता है। इससे बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी अनिवार्य हैं।
- हाथों की सफाई: अपनी आंखों को बार-बार गंदे हाथों से न छुएं।
- सनग्लासेस का प्रयोग: बाहर निकलते समय धूल और धूप से बचने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले चश्मे पहनें।
- निजी वस्तुओं का साझा न करना: अपना तौलिया, रुमाल या आंखों का मेकअप किसी और के साथ साझा न करें।
- स्क्रीन टाइम कम करें: आंखों को पर्याप्त आराम दें और बार-बार ठंडे पानी से पलकें झपकाएं।
डॉक्टरों ने साफ किया है कि यदि आंखों में लगातार लाली बनी रहे या सूजन बढ़े, तो घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
