Shambhuraj Desai Satara Zila Parishad (फोटो क्रेडिट-X)
Satara Zila Parishad Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में सातारा जिला परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव एक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री शंभूराज देसाई ने सातारा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। देसाई का दावा है कि पुलिस ने किसी अपराधी की तरह उनके साथ धक्का-मुक्की की और सत्ता के दबाव में आकर उनके गठबंधन के सदस्यों को मतदान करने से जबरन रोका। इस घटना की गूंज अब विधानसभा से लेकर विधान परिषद तक सुनाई दे रही है।
चुनाव के दौरान हुए इस अभूतपूर्व हंगामे में शंभूराज देसाई और कैबिनेट मंत्री मकरंद पाटिल के साथ पुलिस की तीखी झड़प हुई। देसाई का आरोप है कि पुलिस ने गुंडों जैसा व्यवहार किया और सादे कपड़ों में आकर उनके सदस्यों को उठा लिया, ताकि भाजपा का अध्यक्ष बनवाया जा सके।
मंत्री शंभूराज देसाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि सातारा पुलिस ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे अपने सदस्यों के साथ मतदान केंद्र की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। देसाई ने कहा, “10-10 पुलिसकर्मी मुझे खींच रहे थे, कोई हाथ पकड़ रहा था तो कोई पैर। इस धक्का-मुक्की में मुझे चोटें आई हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस को किसी कथित अपहरण मामले में कार्रवाई करनी ही थी, तो वह होटल में बैठक के दौरान क्यों नहीं की गई? मतदान के ठीक पहले की गई यह कार्रवाई सीधे तौर पर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की साजिश थी।
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इस मुद्दे ने सदन के भीतर भी भारी तनाव पैदा कर दिया। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद इस घटना का संज्ञान लेते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक और स्थानीय एसपी को फोन कर मतदान के बाद कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोऱ्हे ने सातारा के पुलिस अधीक्षक (SP) के निलंबन के आदेश दे दिए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों की जांच की जाएगी और उसके आधार पर ही उचित कार्रवाई होगी।
सातारा जिला परिषद के गणित पर नजर डालें तो शिवसेना-राष्ट्रवादी गठबंधन के पास 65 में से 35 सीटें थीं, जो बहुमत (33) से अधिक थीं। दूसरी ओर, भाजपा के पास केवल 27 सीटें थीं। हालांकि, चुनाव के दिन पासा पलट गया। भाजपा ने शिवसेना के 2 और राष्ट्रवादी के 3 सदस्यों को अपने पाले में कर लिया। शिवसेना का आरोप है कि उनके 2 सदस्यों को पुलिस ने झूठे अपहरण के मामले में हिरासत में लेकर मतदान से वंचित कर दिया, जिससे भाजपा को जीत हासिल करने में मदद मिली। देसाई ने चेतावनी दी है कि व्हिप का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।