अजित पवार चाहते थे NCP के दोनों गुटों का विलय; संजय राउत ने बताया क्यों और किसने डाली रुकावट
Sanjay Raut: संजय राउत ने दावा किया है कि अजित पवार एनसीपी के दोनों गुटों को एकजुट करना चाहते थे, लेकिन उनके अपने ही लोगों ने अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने के लिए उन्हें ऐसा करने से रोका।
- Written By: आंचल लोखंडे
संजय राउत ने शिंदे गुट और NCP के कुल 50 विधायकों के भाजपा में जाने की भविष्यवाणी की है। (फोटो सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai/New Delhi: शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। रविवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए राउत ने दावा किया कि दिवंगत नेता अजित पवार अपनी पार्टी और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) को एकजुट करने के लिए बेहद गंभीर थे। उन्होंने कई बैठकें भी की थीं, लेकिन उनकी ही पार्टी के कुछ नेताओं ने इस राह में रोड़े अटकाए।
राजनीतिक प्रासंगिकता खत्म होने का डर संजय राउत के अनुसार, अजित पवार की पार्टी के भीतर कुछ प्रभावशाली लोग नहीं चाहते थे कि दोनों गुटों का विलय हो। राउत ने कहा, “अजित दादा को शरद पवार पर अटूट भरोसा था। यदि विलय हो जाता, तो उन लोगों की राजनीतिक प्रासंगिकता पूरी तरह खत्म हो जाती जो विभाजन के कारण मलाई काट रहे थे। इसीलिए उन्होंने अजित पवार को एकजुटता के कदम बढ़ाने से रोका।”
प्रफुल्ल पटेल पर निशाना
सुनेत्रा पवार को दी सलाह और प्रफुल्ल पटेल पर निशाना राउत ने प्रफुल्ल पटेल का नाम लिए बिना उन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मूल रूप से ‘पाटिल’ (मराठी समाज) की पार्टी है। उन्होंने अजित पवार की पत्नी और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से आग्रह किया कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पार्टी का नेतृत्व ‘पटेल’ जैसे लोगों के हाथों में न चला जाए। राउत ने स्पष्ट किया कि विलय की स्थिति में शरद पवार का भाजपा के साथ जाने का कोई इरादा नहीं था।
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एनसीपी (अजित गुट) के भीतर चल रही खींचतान
विमान हादसे के बाद बढ़ी हलचल गौरतलब है कि बीते बुधवार को बारामती के पास हुए एक दुखद विमान हादसे में अजित पवार की मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के बाद अब पार्टी की कमान और शरद पवार के साथ भविष्य के रिश्तों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। राउत के इस बयान ने एनसीपी (अजित गुट) के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है।
