महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल: एनडीए का हिस्सा बनी रहेगी राकांपा, सुनील तटकरे ने विलय की खबरों को किया खारिज
NCP Merger Talks: महाराष्ट्र में राकांपा के विलय की खबरों के बीच सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया है कि पार्टी राजग (NDA) का अटूट हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने विलय की खबरों को महज अटकलें बताई।
- Written By: आंचल लोखंडे
Ajit Pawar ideology (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai News: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
रविवार को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए तटकरे ने साफ तौर पर कहा कि राकांपा, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया जिनमें दावा किया जा रहा था कि 12 फरवरी को राकांपा और शरद पवार गुट (राकांपा-शप) के विलय की घोषणा की जा सकती है।
अजित दादा की विचारधारा ही हमारा मार्ग
सुनील तटकरे ने भावुक होते हुए कहा कि पार्टी दिवंगत नेता अजित पवार द्वारा निर्धारित मार्ग और उनकी विचारधारा पर अडिग है। उन्होंने कहा, “लोग चाहे जो भी कहें, हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। अजित दादा ने राजग के साथ जाने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया था और हम उनके इस निर्णय के साथ खड़े हैं। हम इस गठबंधन के साथ थे और भविष्य में भी बने रहेंगे।” तटकरे ने इस बात पर जोर दिया कि अजित पवार के नेतृत्व में ही सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए गए थे।
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सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण पर दी सफाई
अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने में की गई “जल्दबाजी” को लेकर हो रही आलोचनाओं का भी तटकरे ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महाराष्ट्र की स्थिरता और पार्टी की मजबूती के लिए लिया गया था। तटकरे के अनुसार, अजित पवार का विकसित महाराष्ट्र का जो दृष्टिकोण था, उसे पूरा करने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने राजग के भीतर सहयोग के लिए भाजपा की भी सराहना की।
विलय की अटकलों पर उठाए सवाल
विलय की चर्चाओं को लेकर तटकरे ने विपक्षी नेताओं पर हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही इस तरह की बातें क्यों शुरू कर दी गईं? उन्होंने कहा कि यह महज एक धारणा बनाई जा रही है कि वह (तटकरे) विलय के खिलाफ हैं, जबकि सच्चाई यह है कि विलय को लेकर कोई आधिकारिक चर्चा हुई ही नहीं है। तटकरे ने बताया कि अजित पवार की अस्थियों को राज्य के सभी जिलों में ले जाया जाएगा ताकि जनता उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सके।
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मुख्यमंत्री फडणवीस और रोहित पवार का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर विलय की कोई बातचीत अंतिम चरण में होती, तो अजित पवार ने उन्हें निश्चित रूप से सूचित किया होता। फडणवीस ने 12 फरवरी की किसी भी तारीख की जानकारी होने से इनकार किया। वहीं दूसरी ओर, शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि वह पिछले तीन महीनों से विलय की गुप्त वार्ताओं में शामिल थे। रोहित पवार ने कहा कि वह 13 दिनों की शोक अवधि समाप्त होने के बाद ही इस संबंध में बड़े खुलासे करेंगे।
वर्तमान परिस्थितियों में महाराष्ट्र की राजनीति एक संवेदनशील मोड़ पर है, जहाँ एक तरफ अजित पवार की विरासत को बचाने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ पार्टी के अस्तित्व को लेकर दावों का दौर जारी है।
