60,000 छात्राओं को हर महीने 4.2 लाख मुफ्त सेनेटरी पैड, सांसद पीयूष गोयल की सराहनीय पहल
Piyush Goyal: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के बीएमसी स्कूलों की 60,000 छात्राओं के लिए हर महीने 4.2 लाख मुफ्त सेनेटरी पैड वितरित करने की पहल शुरू की है।
- Written By: आंचल लोखंडे
60,000 छात्राओं को हर महीने 4.2 लाख मुफ्त सेनेटरी पैड
Mumbai News: उत्तर मुंबई के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई के सभी बीएमसी स्कूलों की लगभग 60,000 छात्राओं को हर महीने मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने के महाअभियान का शुभारंभ किया है। इस पहल के तहत हर माह कुल 4,20,000 सेनेटरी पैड वितरित किए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों की कमी के कारण किसी भी छात्रा की शिक्षा या गरिमा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
केंद्रीय मंत्री गोयल ने हाल ही में उद्घाटन किए गए मुंबई पब्लिक स्कूल, मंडपेश्वर में छात्राओं को सेनेटरी पैड वितरित कर इस पहल की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि स्कूलों में स्वच्छता उत्पाद उपलब्ध कराना छात्राओं के आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और निर्बाध शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ संकल्प के अनुरूप बताया, जो बेटियों को शिक्षा, सम्मान और प्रगति के अवसर उपलब्ध कराता है।
बढ़ेगा आत्मविश्वास
जागरूकता बढ़ाने के लिए गोयल ने बीएमसी शिक्षा विभाग को ‘पैडमैन’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ फिल्में छात्राओं को दिखाने की सलाह दी। यह पहल छात्राओं की स्वच्छता, सम्मान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श स्थापित करेगी, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और शैक्षणिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
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सेनेटरी पैड का महत्व एवं लाभ
- स्वास्थ्य व स्वच्छता-संक्रमण व अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम होता है।
- गरिमा व आराम-दैनिक गतिविधियों में बिना किसी झिझक सहभागिता संभव होती है।
- शिक्षा में निरंतरता-मासिक धर्म के दिनों में स्कूल न छोड़ने की आवश्यकता नहीं रहती।
- इस पहल से छात्राओं को होने वाले लाभ
- नियमित उपस्थिति -पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आएगी
- स्वास्थ्य सुरक्षा-संक्रमण व स्वास्थ्य जोखिम कम होंगे
- आत्मविश्वास में वृद्धि-चिंता व शर्मिंदगी में कमी
- आर्थिक सहायता-गरीब परिवारों पर मासिक खर्च का बोझ कम
- सशक्तिकरण-शिक्षा व सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर
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- निर्बाध शिक्षा: मासिक धर्म के दौरान भी स्कूल नियमित
- स्वास्थ्य सुरक्षा: गुणवत्तापूर्ण स्वच्छता उत्पाद
- आर्थिक राहत: परिवारों पर अतिरिक्त खर्च कम
- आत्मविश्वास में वृद्धि: पढ़ाई पर पूरा ध्यान
- सामाजिक गरिमा: स्वच्छता व जागरूकता में सुधार
