अशोक खरात केस में रूपाली चाकणकर पर गिरेगी गाज? कांग्रेस ने पुराना पत्र जारी कर सह-आरोपी बनाने की मांग की
Rupali Chakankar: अशोक खरात मामले में रूपाली चाकणकर का पुराना पत्र वायरल। कांग्रेस ने उन पर आरोपी को बचाने का आरोप लगाते हुए सह-आरोपी बनाने और जांच की मांग की है।
- Written By: अनिल सिंह
Rupali Chakankar Ashok Kharat (फोटो क्रेडिट-X)
Rupali Chakankar Ashok Kharat: नासिक के अशोक खरात मामले में अब एक नया और विस्फोटक मोड़ आ गया है। कांग्रेस ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक पुराना पत्र सार्वजनिक किया है। इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया है, क्योंकि यह पत्र दर्शाता है कि एक साल पहले ही इस मामले की भनक लग चुकी थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय कथित तौर पर इसे दबाने की कोशिश की गई।
खबरों के मुताबिक, एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र ने ‘कैप्टन के कारनामे’ शीर्षक से एक साल पहले ही अशोक खरात के कुकर्मों की ओर इशारा किया था। हालांकि, उस समय महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने उस खबर का संज्ञान लेकर आरोपी की जांच करने के बजाय, संबंधित अखबार के संपादक को ही नोटिस जारी कर दिया था। चाकणकर ने संपादक से माफी मांगने को कहा था और पुलिस को पत्र लिखकर अखबार के खिलाफ मामला दर्ज करने और उसे बंद करने तक के निर्देश दिए थे।
कांग्रेस का तीखा प्रहार: चाकणकर को सह-आरोपी बनाने की मांग
महाराष्ट्र कांग्रेस ने रूपाली चाकणकर के उस पुराने पत्र को साझा करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि यदि एक साल पहले ही समाचार पत्र द्वारा उठाए गए मुद्दों की गंभीरता से जांच की गई होती, तो कई महिलाओं को इस दरिंदगी से बचाया जा सकता था। पार्टी ने मांग की है कि रूपाली चाकणकर को इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाए, क्योंकि उन्होंने आरोपी अशोक खरात को बचाने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और सच्चाई दबाने की कोशिश की।
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गृहमंत्री की कार्रवाई पर उठे सवाल: ‘खुद की पीठ न थपथपाएं’
कांग्रेस ने गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अब जब वीडियो वायरल होने के बाद मजबूरी में कार्रवाई हो रही है, तो सरकार को अपनी पीठ नहीं थपथपानी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि यदि सरकार वास्तव में न्यायप्रिय होती, तो साल भर पहले ही कार्रवाई सुनिश्चित की जाती। कांग्रेस ने महायुति सरकार के उन सभी मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की भी जांच की मांग की है, जिनके संबंध अशोक खरात के साथ बताए जा रहे हैं, ताकि सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने आ सके।
महिला आयोग की भूमिका पर खड़ा हुआ संवैधानिक संकट
यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा रहा है। महिला आयोग जैसी संस्था, जिसका काम पीड़ितों की रक्षा करना है, उस पर एक आरोपी को संरक्षण देने और पत्रकारों को डराने-धमकाने के आरोप लग रहे हैं। चाकणकर द्वारा पुलिस को लिखे गए पत्र के सामने आने के बाद, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस आंतरिक दबाव और विपक्षी हमलों का सामना कैसे करती है।
