Vasai Nalasopara में नकली ‘मिनरल वाटर’ का धंधा, अवैध प्लांट्स से सेहत पर खतरा
Vasai Nalasopara Fake Mineral Water News: वसई-नालासोपारा में अवैध पानी प्लांट्स ‘मिनरल वाटर’ के नाम पर अशुद्ध पानी बेच रहे हैं। इससे नागरिकों की सेहत और जेब दोनों पर असर पड़ रहा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
वसई नकली मिनरल वाटर का मामला (सौ. सोशल मीडिया )
Vasai Nalasopara Fake Mineral Water: अगर आप भी प्यास बुझाने के लिए बाजार से खरीदी गई पानी की बोतल या घर पर आने वाले 20 लीटर के जार पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए।
वसई और नालासोपारा के शहरी और ग्रामीण इलाकों में ‘मिनरल वाटर’ के नाम पर अशुद्ध पानी बेचने का काला कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।प्रशासन की अनदेखी का फायदा उठाकर अवैध पानी प्लांट नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
नियमों के मुताबिक, बोतलबंद पानी बेचने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन एफडीए और भारतीय मानक ब्यूरो बीआईएस का लाइसेंस अनिवार्य है।पानी की गुणवत्ता की सख्त जांच के बाद ही इसे बेचने की अनुमति दी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
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वसई के विभिन्न हिस्सों में खासकर के स्लम इलाकों सैकड़ों ऐसे अवैध प्लांट खुल गए हैं जिनके पास न तो लाइसेंस है और न ही शुद्धिकरण की कोई मशीनरी। ये प्लांट सीधे नल के पानी को बोतलों और जारों में भरकर उन्हें सील कर देते हैं।
बढ़ती गर्मी और महापालिका द्वारा कम दबाव से पानी की आपूर्ति के कारण लोग बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गए हैं। मांग बढ़ते ही मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गलियों और छोटी दुकानों में बिना ब्रांड वाला पानी धड़ल्ले से बिक रहा है। एफडीए द्वारा अब तक इन फर्जी संयंत्रों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्धता की जांच का कोई तंत्र मौजूद नहीं है।
शहरवासियो की जेब पर डाका, 30 रुपये का जार 50 में
- अशुद्ध पानी न केवल सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि आम आदमी की जेब भी काट रहा है। 20 लीटर पानी का जार, जिसकी औसत कीमत 30 से 40 रुपये होनी चाहिए, वह अब कृत्रिम कमी दिखाकर 50 रुपये तक में बेचा जा रहा है। शुद्ध पानी के नाम पर यह सीधे तौर पर नागरिकों की खुली लूट है। अशुद्ध पानी पीने से टाइफाइड, हैजा और गैस्ट्रो जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
- पानी खरीदते समय हमेशा बोतल पर ईएसआई मार्क और एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। जार की सील टूटी हो तो उसे न लें। जब तक प्रशासन इन अवैध पानी प्लांट माफियाओं पर शिकंजा नहीं कसता, तब तक नागरिकों को स्वयं सतर्क रहना होगा, याद रखें, शुद्धता का पैकेट देख लेना ही काफी नहीं है, उसकी प्रमाणिकता की जांच भी जरूरी है।
समय-समय पर कार्रवाई करना हमारी प्राथमिकता है ताकि जनता को राहत मिल सके। ऐसी अनिमियतताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन आने वाले दिनों में और अधिक सक्रियता से अभियान चलाएगा।
– सुरेंद्र ठाकरे, जल आपूर्ति विभाग अधिकारी
मानकों की हो रही नजरअंदाजगी
वसई-विरार के स्लम इलाकों में मानकों को ताक पर रखकर चल रहे अवैध पानी के प्लांट सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। प्रशासन की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या अधिकारियों को लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है? हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। शुद्ध पानी का अधिकार हर नागरिक का है और इन मिलावटी माफियाओं पर तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तुलींज पुलिस 59 लोगों पर एफआईआर दर्ज किए गए थे।
– एड अनिल चौहान, स्थानीय नेता
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वसई-विरार क्षेत्र में नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अवैध पानी प्लांट को बख्शा नहीं जाएगा, जो भी लोग गैर-कानूनी तरीके से पानी का व्यापार कर रहे हैं और मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन पर प्रशासन को कड़ी से कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
-मनोज पाटिल, विरोधी पक्ष नेता, वसई-विरार महापालिका
