महायुति में बड़ी दरार? संजय शिरसाट बोले- 2029 में भाजपा और शिवसेना लड़ सकते हैं अलग चुनाव
Sanjay Shirsat on BJP Shiv Sena Alliance: संजय शिरसाट के बयान से महायुति में खलबली। 2029 में भाजपा और शिवसेना लड़ सकते हैं अलग चुनाव। देवेंद्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया।
- Written By: अनिल सिंह
शिरसाट के बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में भूकंप, महायुति के भविष्य पर सवाल (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Shirsat on Mahayuti Split: महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं होने के संकेत मिलने लगे हैं। शिवसेना के विधायक और प्रवक्ता संजय शिरसाट ने शनिवार (2 मई) को एक ऐसा बयान दिया है जिससे गठबंधन के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। शिरसाट ने स्पष्ट रूप से कहा कि शिवसेना और भाजपा के बीच ऐसा कोई स्थायी समझौता नहीं है जो उन्हें 2029 का विधानसभा चुनाव साथ लड़ने के लिए मजबूर करे।
शिरसाट ने गठबंधन की नाजुकता को रेखांकित करने के लिए 2014 के घटनाक्रम का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उस समय केवल एक सीट पर सहमति न बनने के कारण सालों पुराना गठबंधन पल भर में टूट गया था। उनके इस बयान का सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि शिवसेना अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
पार्टी विस्तार और आत्मनिर्भरता पर जोर
संजय शिरसाट के सुर में सुर मिलाते हुए कैबिनेट मंत्री उदय सामंत ने भी पार्टी के संगठनात्मक विस्तार की वकालत की। उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल के रूप में शिवसेना को अपनी ताकत बढ़ाने का पूरा अधिकार है। शिरसाट ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि शिवसेना आने वाली किसी भी राजनीतिक चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है, चाहे वह अकेले चुनाव लड़ना ही क्यों न हो।
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फडणवीस की सधी हुई प्रतिक्रिया
इस बयान से उत्पन्न हुए विवाद पर जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही नपी-तुली प्रतिक्रिया दी। फडणवीस ने कहा कि ऐसे नीतिगत और राजनीतिक फैसलों पर टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने गेंद उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के पाले में डालते हुए कहा कि इस विषय पर केवल वे ही आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकते हैं।
बदलते राजनीतिक समीकरण
शिरसाट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है या फिर वास्तव में शिवसेना (शिंदे गुट) अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। बहरहाल, इस बयान ने महाविकास आघाड़ी (MVA) को गठबंधन पर तंज कसने का एक नया मौका दे दिया है।
